
Chhattisgarh Food Processing: देश में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और अनुमान है कि 2025-26 तक यह 535 बिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। इसके बावजूद भारत में अभी भी बहुत बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद कच्चे रूप में ही बाजार तक पहुंचते हैं। यही वह मौका है, जिसे छत्तीसगढ़ अब बड़े आर्थिक अवसर में बदलने की तैयारी कर रहा है।
छत्तीसगढ़ को लंबे समय से “धान का कटोरा” कहा जाता है, लेकिन अब राज्य सिर्फ धान तक सीमित नहीं रहना चाहता। यहां हर साल करीब 1.15 करोड़ मीट्रिक टन धान का उत्पादन होता है। इसके अलावा मक्का, गेहूं, चना और अन्य अनाज भी बड़ी मात्रा में पैदा होते हैं।
बागवानी की बात करें तो राज्य में सब्जियों का उत्पादन 67 लाख टन से ज्यादा, फलों का 24 लाख टन और मसालों का 4.6 लाख टन से अधिक है। इसके साथ ही महुआ, इमली, साल बीज, आंवला और हर्रा जैसे वन उत्पाद भी बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं, जिन्हें प्रोसेस कर बेहतर कीमत हासिल की जा सकती है।
अभी तक छत्तीसगढ़ के ज्यादातर कृषि और वन उत्पाद कच्चे रूप में ही दूसरे राज्यों या विदेशों में भेजे जाते हैं। सरकार चाहती है कि अब यही प्रोसेसिंग राज्य के भीतर हो, ताकि किसानों को बेहतर दाम मिले और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। राज्य के उद्योग विभाग के अनुसार, “छत्तीसगढ़ में कच्चे माल की कोई कमी नहीं है। अगर प्रोसेसिंग यूनिट्स यहीं लगेंगी, तो लागत कम होगी और उद्योगों को सीधा फायदा मिलेगा।”
छत्तीसगढ़ सरकार ने नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के तहत फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को प्राथमिकता दी है। 50 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाले उद्योगों को 30% तक पूंजी सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा 12 साल तक बिजली शुल्क में छूट, 5 साल तक ब्याज सब्सिडी, स्टांप ड्यूटी में 100% छूट, कर्मचारियों के EPF में सहायता, निर्यात के लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी दी जाएगी। सरकार का दावा है कि 100 करोड़ के निवेश पर करीब 69 करोड़ रुपये तक का लाभ निवेशकों को मिल सकता है।
राज्य सरकार ने फूड प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए धमतरी में पहले से फूड पार्क विकसित किया है। इसके अलावा रायपुर, बेमेतरा, कांकेर, गरियाबंद, राजनांदगांव, जशपुर, सरगुजा और सुकमा सहित 10 जिलों में नए फूड पार्क खोले जा रहे हैं। इससे उद्योगों को कच्चा माल उत्पादन क्षेत्र के पास ही मिलेगा, जिससे परिवहन लागत कम होगी।
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उत्पादन, सरकारी प्रोत्साहन, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर लॉजिस्टिक्स के कारण छत्तीसगढ़ अब फूड प्रोसेसिंग सेक्टर का अगला बड़ा हब बन सकता है।