रायपुर

पत्रिका पड़ताल: NH पर 200 से ज्यादा मौतें! 300 करोड़ की टोल वसूली के बावजूद छत्तीसगढ़ के हाईवे असुरक्षित, जानें वजह

Highway Accidents Chhattisgarh: रायपुर और बिलासपुर संभाग में ही पिछले कुछ वर्षों में मवेशियों से टकराने और ब्लैक स्पॉट पर हुए हादसों में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जिससे टोल वसूली के बावजूद यात्रियों को सुरक्षित सफर नहीं मिलने पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
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Aug 03, 2026
Chhattisgarh News
छत्तीसगढ़ के हाईवे असुरक्षित (फोटो सोर्स- AI)

Chhattisgarh National Highway: नेशनल हाईवे (एनएच) पर सफर करने वाले लाखों यात्रियों और वाहन चालकों के लिए अब सडक़ के साथ-साथ अपनी जान बचाना सबसे बड़ा सवाल बनता जा रहा है। प्रदेश के 26 टोल प्लाजा से हर महीने करीब 300 करोड़ रुपए का भारी-भरकम राजस्व नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और सडक़ निर्माण कंपनियों के खातों में जा रहा है। रोजाना औसतन 10 करोड़ रुपए से अधिक की टोल वसूली के बावजूद हाईवे पर यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। रोजाना शुल्क चुकाने के बाद भी चालकों को न तो सुरक्षित सफर मिल रहा है और न ही हादसों से निजात।

200 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी

पत्रिका द्वारा की गई पड़ताल में सामने आया है कि प्रदेश में टोल दरों में हाल ही में 5 से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है, जबकि सालाना पास पर भी 75 रुपए बढ़ा दिए गए हैं। इसके बावजूद हाईवे पर खुलेआम घूमते आवारा मवेशी और अंधेरे में बिना सुरक्षा इंतजाम वाले खतरनाक 'ब्लैक स्पॉट' वाहन चालकों के लिए काल सिद्ध हो रहे हैं। रायपुर और बिलासपुर संभाग में ही पिछले कुछ वर्षों में मवेशियों से टकराकर और ब्लैक स्पॉट के कारण 200 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। अकेले रायपुर में अग्रसेन धाम से सरोना के बीच बीते 5 सालों में हादसों की वजह से 191 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

एनएचएआई का दावा….

एनएचएआई का दावा है कि मवेशियों की निगरानी के लिए हाईवे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और टीमें भी तैनात की गई हैं। लेकिन मवेशियों को हटाने की मुख्य जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर निगम पर डालकर एनएचएआई अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लेता है। इस प्रशासनिक खींचतान का खामियाजा रोजाना गुजरने वाले 10 लाख से अधिक यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। कई स्थानों पर तो स्थिति यह है कि टोल प्लाजा के ठीक आसपास ही मवेशियों ने स्थायी डेरा जमा रखा है।

गुजरात हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी

गुजरात हाईकोर्ट ने हाईवे पर मवेशियों की समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि नेशनल हाईवे से आवारा मवेशी और अन्य बाधाएं नहीं हटाई जा सकतीं, तो टोल वसूली तुरंत बंद कर देनी चाहिए। कोर्ट ने बेसहारा मवेशियों और श्वानों का विस्तृत डेटा तलब किया है।

जिलों में हाईवे का हाल…

जांजगीर-चांपा (एनएच-49): अकलतरा से मसनिया कला तक लगभग 120 किलोमीटर की दूरी में सडक़ पर मवेशियों का जमावड़ा रहता है। अमरताल के पास हाल ही में हुए चक्काजाम के बाद अधिकारियों ने एनएच पर स्पीडब्रेकर बनाकर औपचारिकता पूरी कर ली।

दुर्ग-भिलाई व राजनांदगांव (एनएच-53): राजनांदगांव से भिलाई तक तेज रफ्तार वाहनों के बीच हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ठाकुरटोला टोल प्लाजा के दोनों ओर और भिलाई बायपास टोल से 500 मीटर पहले सडक़ पर ही मवेशी बैठे मिलते हैं। पार्रीनाला, सुंदरा और मनकी चौक दुर्घटना के मुख्य केंद्र बने हुए हैं।

धमतरी (एनएच-30): शहर के बीच से गुजरने वाले हाईवे पर दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है, जबकि आधी रात को सडक़ें 'गौठान' जैसी नजर आती हैं। यहां आए दिन तेज रफ्तार गाडिय़ों की चपेट में आने से मवेशी और बाइक सवार अपनी जान गंवा रहे हैं।

फैक्ट फाइल

  • कम ट्रैफिक वाला टोल: 10 से 20 लाख रुपए/दिन
  • सामान्य टोल प्लाजा: 20 से 40 लाख रुपए/दिन
  • अधिक ट्रैफिक मालवाहक कॉरीडोर: 40 लाख रुपए से अधिक/दिन
  • 26 टोल का रोजाना औसतन राजस्व: 10 करोड़ रुपए से अधिक
  • महीने का औसतन राजस्व: 250 से 300 करोड़ रुपए
Updated on:
03 Aug 2026 06:51 am
Published on:
03 Aug 2026 06:51 am