
Nava Raipur Technology Hub: छत्तीसगढ़ की पहचान अब तक मुख्य रूप से कोयला, स्टील, सीमेंट और बिजली उत्पादन जैसे पारंपरिक उद्योगों से रही है, लेकिन आने वाले समय में प्रदेश की यह तस्वीर बदल सकती है। राज्य सरकार अब उद्योगों के नए क्षेत्रों पर ध्यान दे रही है। इसमें आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल खनिज आधारित उद्योगों तक सीमित रखने के बजाय आधुनिक तकनीक और नए कारोबार का केंद्र बनाना है।
पिछले तीन वर्षों में प्रदेश को 9 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनमें से कई परियोजनाओं पर काम भी शुरू हो चुका है। इनसे करीब पौने दो लाख लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि नवा रायपुर को भविष्य के टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है।
राज्य सरकार नवा रायपुर को आधुनिक तकनीक और नए उद्योगों के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के साथ उद्योगों के अनुकूल माहौल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में करीब 1100 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर परियोजना पर काम चल रहा है। इसके अलावा आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं। सरकार टेक्नोलॉजी हब के साथ इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। औद्योगिक विकास नीति 2024-2030 के तहत ग्रीन स्टील, आईटी, AI, टेक्सटाइल और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इससे नए उद्योगों को प्रदेश में निवेश करने का अवसर मिलेगा।
छत्तीसगढ़ को मध्य भारत के बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स केंद्र के रूप में विकसित करने में रेल नेटवर्क की अहम भूमिका होगी। प्रदेश में फिलहाल 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाएं चल रही हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे कच्चे माल और तैयार उत्पादों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना आसान होगा।
परिवहन पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है। रेल नेटवर्क मजबूत होने का फायदा केवल बड़े उद्योगों को ही नहीं मिलेगा, बल्कि किसानों और छोटे कारोबारियों को भी होगा। वे अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंचा सकेंगे। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।
नवा रायपुर में प्रदेश की पहली कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण इकाई स्थापित की जा रही है। इस परियोजना में 152.74 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इससे करीब 3,500 युवाओं को रोजगार मिलने की संभावना है। इसके अलावा यश फैन्स एंड एप्लायंसेस लिमिटेड की ओर से 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव है। इस परियोजना से भी 3,500 से ज्यादा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है।
इन परियोजनाओं से प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स और उपकरण निर्माण से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ छोटे और सहायक कारोबारों को भी फायदा होने की संभावना है।
छत्तीसगढ़ में ग्रीन स्टील उद्योग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इस क्षेत्र में 13,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनसे करीब 10,921 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा सिंगापुर प्रवास के दौरान डेटा सेंटर, कौशल विकास और हरित परियोजनाओं से जुड़े समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर सहमति बनी है।
इनमें 41,750 करोड़ रुपये के AI-रेडी डेटा सेंटर कैंपस जैसे बड़े निवेश प्रस्ताव भी शामिल हैं। डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। इनमें बड़ी मात्रा में डिजिटल जानकारी सुरक्षित रखी जाती है और ऑनलाइन सेवाओं को संचालित करने के लिए जरूरी तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। ऐसे प्रोजेक्ट आने से आईटी और तकनीकी क्षेत्र में प्रशिक्षित युवाओं के लिए नए अवसर बन सकते हैं।
छत्तीसगढ़ के कई शहर पहले से ही बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में पहचाने जाते हैं। रायपुर के उरला और सिलतरा, भिलाई-दुर्ग का बोरई, बिलासपुर का सिरगिट्टी और कोरबा के औद्योगिक क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं। इन क्षेत्रों में इस्पात, सीमेंट, एल्युमीनियम, बिजली उत्पादन और खनन से जुड़े उद्योग बड़ी संख्या में संचालित हैं। प्रदेश के कुल उद्यमों में 71 प्रतिशत से अधिक सेवा क्षेत्र से जुड़े हैं। इससे पता चलता है कि राज्य में उद्योगों के साथ सेवाओं का कारोबार भी तेजी से विस्तार कर रहा है।
छत्तीसगढ़ के पास उद्योगों के विकास के लिए केवल खनिज संपदा ही नहीं, बल्कि वन संपदा भी एक बड़ी ताकत है। प्रदेश का 44 प्रतिशत से अधिक भू-भाग जंगलों से घिरा हुआ है। यहां इमली, महुआ, चिरौंजी, हर्रा, बहेड़ा और कई तरह के औषधीय संसाधन उपलब्ध हैं। इन वन उत्पादों का प्रसंस्करण कर बाजार में बेहतर कीमत पर बेचा जा सकता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर फूड प्रोसेसिंग और वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने की जरूरत है। इससे वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और जनजातीय परिवारों को अपने क्षेत्र में ही रोजगार और कारोबार के अवसर मिल सकते हैं। कच्चे वन उत्पादों को सीधे बेचने के बजाय उनसे तैयार उत्पाद बनाने पर उनकी कीमत भी बढ़ सकती है।
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास का इतिहास काफी पुराना है। वर्ष 1896 में राजनांदगांव में बंगाल नागपुर कॉटन मिल की स्थापना हुई थी। इसके बाद 1935 में रायगढ़ में जूट मिल शुरू हुई। भिलाई इस्पात संयंत्र की स्थापना के लिए 2 फरवरी 1955 को भारत और तत्कालीन सोवियत संघ के बीच समझौता हुआ था। इसके बाद 1965 में बिलासपुर-कोरबा क्षेत्र में बालको एल्युमीनियम संयंत्र और 1967-68 में रायपुर में रेलवे वैगन वर्कशॉप शुरू हुई। 1960 से पहले प्रदेश में बड़े और मध्यम उद्योगों की संख्या केवल चार थी। वर्ष 1990 से 2000 के बीच यह संख्या बढ़कर 165 हो गई। राज्य बनने के बाद औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार और तेज हुआ।
प्रदेश में बड़े उद्योगों के साथ छोटे और मध्यम कारोबार भी तेजी से बढ़ रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 80 हजार एमएसएमई इकाइयां और 98,256 से अधिक बड़े एवं मध्यम आकार की औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। वहीं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की संख्या 4,61,454 बताई गई है। छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के तहत 1,983 उद्योग पंजीकृत हैं। छोटे उद्योग स्थानीय स्तर पर रोजगार देने के साथ बड़े उद्योगों को जरूरी सामान और सेवाएं भी उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में नए निवेश से इन कारोबारों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने की है। इसके लिए नए उद्योगों के साथ कौशल विकास पर भी ध्यान देना होगा, ताकि प्रदेश के युवाओं को आधुनिक तकनीक और नए कारोबारों में काम करने का मौका मिल सके। उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के अनुसार, नई औद्योगिक नीति से प्रदेश में निवेश बढ़ रहा है और रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।
सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ पारंपरिक उद्योगों के साथ आधुनिक तकनीक और भविष्य के कारोबारों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाए। अगर निवेश प्रस्ताव तय समय पर धरातल पर उतरते हैं, तो आने वाले वर्षों में नवा रायपुर प्रदेश की औद्योगिक पहचान को नई दिशा दे सकता है। इससे छत्तीसगढ़ को कोयला, स्टील और सीमेंट के साथ-साथ आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, AI और डेटा सेंटर के क्षेत्र में भी पहचान मिलने की संभावना है।