रायपुर

Chhattisgarh Noise Pollution Bill: 50 हजार जुर्माना देकर रातभर बजा सकेंगे डीजे? नए कोलाहल नियंत्रण विधेयक पर सवाल

Noise Pollution Bill: छत्तीसगढ़ के कोलाहल नियंत्रण विधेयक 2026 के प्रारूप पर पर्यावरणविद् नितिन सिंघवी ने 10 बिंदुओं पर आपत्ति जताई है।
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Oct 13, 2026
Chhattisgarh Noise Pollution Bill
50 हजार जुर्माना देकर रातभर बजा सकेंगे डीजे (Photo Patrika)

Noise Pollution Bill: छत्तीसगढ़ में डीजे, लाउडस्पीकर और तेज आवाज पर नियंत्रण के लिए प्रस्तावित कोलाहल नियंत्रण विधेयक 2026 को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राज्य सरकार ने मौजूदा नियमों की विसंगतियां दूर करने के उद्देश्य से विधेयक का प्रारूप जारी कर आम लोगों से सुझाव मांगे हैं। लेकिन पर्यावरणविद् नितिन सिंघवी ने इसके कई प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए गृह विभाग के प्रमुख सचिव और पुलिस विभाग को पत्र भेजा है। उनका कहना है कि प्रस्तावित नियमों में जुर्माने की राशि, साइलेंस जोन की सीमा और सार्वजनिक आयोजनों में डीजे बजाने की अनुमति से जुड़े प्रावधानों में बदलाव जरूरी है।

10 बिंदुओं के जरिए आशंका जताई

सिंघवी ने 10 बिंदुओं के जरिए आशंका जताई है कि यदि प्रारूप को इसी रूप में लागू किया गया, तो ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने के बजाय कुछ मामलों में तेज आवाज को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, ये आपत्तियां विधेयक के प्रारूप पर पर्यावरणविद् की ओर से उठाए गए सवाल हैं। अंतिम प्रावधान और उनका वास्तविक प्रभाव विधेयक के अंतिम स्वरूप तथा उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

50 हजार से शुरू जुर्माने पर सवाल

पर्यावरणविद् नितिन सिंघवी ने प्रस्तावित विधेयक में पहली बार उल्लंघन पर न्यूनतम 50 हजार रुपए और दूसरी बार एक लाख रुपए के जुर्माने के प्रावधान पर सवाल उठाया है। उनका तर्क है कि डीजे संचालकों की एक रात की कमाई लाखों रुपए तक हो सकती है। ऐसे में जुर्माने की राशि उनके लिए प्रभावी रोक साबित नहीं होगी।सिंघवी ने पहली बार उल्लंघन पर 5 लाख से 15 लाख रुपए और दूसरी बार 10 लाख से 15 लाख रुपए तक जुर्माना लगाने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि आर्थिक दंड इतना प्रभावी होना चाहिए कि नियमों का उल्लंघन करने से पहले संचालक उसके परिणामों पर विचार करें।

साइलेंस जोन की सीमा 200 से घटाकर 100 मीटर करने पर आपत्ति

विधेयक के प्रारूप में साइलेंस जोन को लेकर प्रस्तावित बदलाव भी आपत्ति का विषय है। सिंघवी के अनुसार, वर्ष 1985 के राज्य कानून में साइलेंस जोन से 200 मीटर के दायरे में लाउडस्पीकर बजाने पर रोक का प्रावधान था, जबकि नए प्रारूप में यह दूरी 100 मीटर रखी गई है। उन्होंने इसे ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य के विपरीत बताते हुए सवाल उठाया है। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य संवेदनशील स्थानों के आसपास शोर को नियंत्रित करना जरूरी है, क्योंकि तेज आवाज मरीजों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र के ध्वनि प्रदूषण नियमों और प्रस्तावित राज्य विधेयक के बीच मौजूद अंतर को दूर किया जाना चाहिए, ताकि अलग-अलग प्रावधानों के कारण नियमों के पालन में भ्रम की स्थिति न बने।

दिन में छह घंटे डीजे बजाने की छूट पर भी आपत्ति

सिंघवी ने विधेयक के प्रारूप में रैली, सार्वजनिक कार्यक्रम और उत्सवों के लिए अनुमति लेकर दिन में छह घंटे तक डीजे बजाने की प्रस्तावित व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि इस तरह की छूट से तेज आवाज पर नियंत्रण का उद्देश्य कमजोर हो सकता है। उनके अनुसार, प्रस्तावित प्रावधानों के तहत सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक डीजे बजाने की अनुमति मिलने पर आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने केंद्रीय ध्वनि प्रदूषण नियमों के साथ इसकी तुलना करते हुए कहा है कि राज्य के प्रारूप में दी जा रही छूट की समीक्षा की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट के आदेशों के पालन पर उठाए सवाल

पर्यावरणविद् ने वाहनों पर साउंड बॉक्स बजाने के मामलों में हाईकोर्ट के पुराने आदेशों के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, हाईकोर्ट ने 6 दिसंबर 2016 और 27 अप्रैल 2017 को आदेश दिए थे कि किसी भी वाहन पर साउंड बॉक्स नहीं बजाया जाएगा। सिंघवी के मुताबिक, आदेशों में पहली बार पकड़े जाने पर जब्त वाहन को कलेक्टर की अनुमति से छोड़ने, दूसरी बार पकड़े जाने पर परमिट निरस्त करने और परमिट की बहाली के लिए हाईकोर्ट के आदेश की शर्त शामिल थी। इसके अलावा वाहनों का रिकॉर्ड रखने की बात भी कही गई थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि पिछले करीब 10 वर्षों में इन निर्देशों का प्रभावी पालन नहीं हुआ। उनके अनुसार, जब्त वाहनों को निर्धारित शर्तों के आधार पर छोड़ने और दोबारा उल्लंघन करने वालों के परमिट निरस्त करने की कार्रवाई भी प्रभावी रूप से नहीं हुई। उनका कहना है कि नए कानून के साथ पुराने न्यायिक आदेशों के पालन की व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए।

साइलेंस जोन में अस्पतालों की परिभाषा पर सवाल

सिंघवी ने साइलेंस जोन के अंतर्गत आने वाले संस्थानों की परिभाषा में अंतर को भी प्रमुख आपत्ति बताया है। उनके अनुसार, केंद्रीय नियमों में सरकारी और निजी अस्पतालों के साथ नर्सिंग होम तथा क्लिनिक भी शामिल हैं, जबकि प्रस्तावित विधेयक में अस्पताल, नर्सिंग होम, शैक्षणिक संस्थान, छात्रावास, न्यायालय और सरकारी कार्यालय जैसे संस्थानों का उल्लेख है। उन्होंने आशंका जताई है कि यदि क्लिनिक सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया, तो साइलेंस जोन की सीमा और उसके दायरे को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। इसलिए विधेयक में संबंधित संस्थानों की परिभाषा स्पष्ट करने की जरूरत बताई गई है।

जेल की सजा का प्रावधान लेकिन कार्रवाई पर सवाल

प्रस्तावित विधेयक में बार-बार नियम तोड़ने वालों के लिए सख्त दंड का प्रावधान भी चर्चा में है। सिंघवी के अनुसार, पुराने राज्य कानून में पहली बार उल्लंघन पर छह महीने और दूसरी बार एक साल तक जेल का प्रावधान था। नए प्रारूप में दूसरी बार उल्लंघन पर दो साल तक की कैद और बाद के अपराधों को गैर-जमानती बनाने का प्रस्ताव है। हालांकि, सिंघवी ने दंड के प्रावधानों के साथ उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि राज्य गठन के बाद से अब तक डीजे संचालकों को जेल भेजने की कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में केवल कानून में सख्त सजा लिख देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, जब तक नियमों का प्रभावी पालन और उल्लंघन पर कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की जाती।

सरकार ने मांगे हैं जनता से सुझाव

कोलाहल नियंत्रण विधेयक 2026 का प्रारूप राज्य में ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से सामने लाया गया है। सरकार ने इस पर आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। ऐसे में पर्यावरणविद् की ओर से उठाए गए सवाल विधेयक के अंतिम स्वरूप में संभावित बदलावों की चर्चा को महत्वपूर्ण बनाते हैं। अब देखना होगा कि सरकार जुर्माने की राशि, साइलेंस जोन की दूरी, सार्वजनिक आयोजनों में डीजे की अनुमति और पुराने न्यायिक आदेशों के पालन से जुड़े सुझावों पर क्या निर्णय लेती है। विधेयक का अंतिम स्वरूप स्पष्ट होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि नए प्रावधान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कितने प्रभावी साबित होंगे।

Updated on:
13 Oct 2026 10:10 am
Published on:
13 Oct 2026 10:09 am