रायपुर

Patrika Exclusive: छत्तीसगढ़ में नर्सिंग की 11 हजार सीटों पर संकट, 31 अक्टूबर तक एडमिशन नहीं तो लैप्स होने का खतरा

Patrika Exclusive: नर्सिंग की 11 हजार से ज्यादा सीटों पर प्रवेश का संकट है। कॉलेजों को एफिलिएशन नहीं मिलने से काउंसिलिंग शुरू नहीं हुई।
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Updated: 28 Oct 2026, 12:57 PM IST
Patrika Exclusive
नर्सिंग की 11 हजार सीट खाली (Photo Patrika)

Patrika Exclusive: प्रदेश के सरकारी व निजी नर्सिंग कॉलेजों में संचालित नर्सिंग की 11 हजार से ज्यादा सीटों पर लैप्स होने का खतरा मंडरा रहा है। ये इसलिए क्योंकि इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) ने एडमिशन की आखिरी तिथि 31 अक्टूबर तय की है। छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल ने कॉलेजों का देरी से निरीक्षण किया और मान्यता भी देरी से दी। दूसरी ओर पं. दीनदयाल उपाध्याय हैल्थ एंड आयुष विवि ने कॉलेजों को अब तक एफिलिएशन नहीं दिया है। इस कारण चिकित्सा शिक्षा विभाग एडमिशन के लिए काउंसिलिंग शुरू नहीं कर सका है। विवि एफिलिएशन देने में आखिरी देरी क्यों कर रहा है? किसी को समझ नहीं आ रहा है।

एडमिशन प्रक्रिया शुरू नहीं होने से कॉलेजों का बुरा हाल

प्रदेश के सरकारी व निजी नर्सिंग कॉलेजों में बीएससी, पोस्ट बेसिक बीएससी व एमएससी कोर्स की पढ़ाई हो रही है, लेकिन इस बार एडमिशन प्रक्रिया शुरू नहीं होने से कॉलेजों का बुरा हाल है। कॉलेजों में बीएससी की 7700 से ज्यादा सीटें हैं। आईएनसी की एडमिशन की आखिरी तारीख निकलने में महज 5 दिन बाकी है। अभी कॉलेजों को एफिलिएशन नहीं मिला है, मतलब काउंसिलिंग नहीं कराई जा सकती। छग नर्सिंग काउंसिल व विवि की लापरवाही का नतीजा है कि एडमिशन प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इससे इस साल जीरो ईयर होने की आशंका बढ़ गई है। कई जानकार सवाल उठा रहे हैं कि अब विवि एफिलिएशन देने की तैयारी कर रहा है तो आखिर दो माह चुपचाप क्यों बैठा रहा? इन दिनों में एफिलिएशन की तैयारी की जाती तो काउंसिलिंग भी शुरू हो गई होती।

शर्तों के साथ दी गई है मान्यता दूसरे सप्ताह में देने से देरी हुई

छत्तीसगढ़ स्टेट नर्सिंग काउंसिल ने अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में नर्सिंग कॉलेजों को शर्तों के साथ मान्यता दी है। इनमें कई कॉलेजों ने आईएनसी से सुइटेबिलिटी सर्टिफिकेट नहीं लिया है। गौर करने वाली बात ये है कि प्रदेश के जिन नर्सिंग कॉलेजों का एफिलिएशन हैल्थ साइंस विवि ने रोक कर रखा है, उन सभी कॉलेजों की मान्यता का रिनुअल काउंसिल ने कर दिया है। विवि ने उन कॉलेजों का एफिलिएशन रोका है, जो एक या दो वर्षों से इंडियन नर्सिंग काउंसिल नई दिल्ली से सुइटेबिलिटी सर्टिफिकेट नहीं लिया है। पत्रिका के पास आईएनसी की वो सूची है, जिनमें 135 में 79 कॉलेजों ने सितंबर तक सुइटेबिलिटी सर्टिफिकेट नहीं लिया है।

शासन की अनुमति के बिना कॉलेज का पता भी बदल दिया

प्रदेश में ऐसे कॉलेज भी है, जिन्होंने राज्य शासन की अनुमति के बिना अपने नर्सिंग कॉलेज को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित कर चुके हैं। तीसरा ऐसे नर्सिंग कॉलेज, जो हाईकोर्ट में गए हैं, जिनका तर्क यह है कि नर्सिंग कॉलेज को संचालित करने के लिए इंडियन नर्सिंग काउंसिल की सुइटेबिलिटी सर्टिफिकेट की आवश्यकता ही नहीं है। बड़ा सवाल है कि जब हैल्थ साइंस विवि एफिलिएिशन रोकता है तो नर्सिंग काउंसिल किस आधार पर इन कॉलेजों की मान्यता रिनुअल कर दिया है। अब एफिलिएशन देने में देरी हो रही है।

अब जागा चिकित्सा शिक्षा विभाग 15 दिसंबर तक प्रवेश की मांग

चिकित्सा शिक्षा विभाग काउंसिलिंग में देरी को देखते हुए आईएनसी को पत्र लिखकर नर्सिंग कोर्स में 15 दिसंबर तक प्रवेश देने की मांग की है। सोमवार को आईएनसी के सेक्रेटरी को लिखे पत्र में कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन ने कहा है कि तकनीकी कारणों से सरकारी व निजी कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। अल्प समय में सभी चरण की काउंसिलिंग कराना भी संभव नहीं है। इसलिए 31 अक्टूबर की तारीख को बढ़ाकर 15 दिसंबर तक प्रवेश देने की अनुमति दें।

Updated on:
28 Oct 2026, 12:57 PM IST
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