रायपुर

International Women’s Day 2026: महिला दिवस पर CM साय की खास चर्चा, बोले- मेरी सफलता के पीछे मां का संघर्ष और पत्नी का साथ

International Women’s Day 2026: विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला पत्रकारों से खास चर्चा करते हुए कहा कि उनकी सफलता के पीछे उनकी मां का संघर्ष और पत्नी का सहयोग है।

3 min read
Mar 08, 2026
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (photo source- Patrika)

@देवेंद्र गोस्वामी/International Women’s Day 2026: किसी भी सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है। महिला ही पुरुष की सफलता की नींव बनती है, जिस पर वह अपने जीवन में ऊंचाइयों को छूता है। 8 मार्च, रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सीएम हाउस में महिला पत्रकारों से अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने महिला पत्रकारों के पूछे गए सवालों का विस्तार से जवाब भी दिया।

अपनी राजनीतिक और निजी जिंदगी के अनछुए पहलुओं के बारे में बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मेरी सफलता के पीछे मां का संघर्ष और पत्नी का हर कदम पर दिया गया साथ है। इसके साथ ही उन्होंने महिला सशक्तीकरण, महिलाओं की खेल में बढ़ती सहभागिता, सुरक्षा, योजनाएं और युवाओं के उज्जवल भविष्य के लिए संदेश भी दिया। महिला पत्रकारों से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सिलसिलेवार अपने जीवन के बारे में बताया।

ये भी पढ़ें

अंर्तराष्ट्रीय महिला दिवस पर देशभर के 400 जिलों में जनसुनवाई होगी, लखपति दीदी की पेंटिंग होंगी प्रदर्शनी

सवाल: हर सफल व्यक्ति के पीछे एक महिला का हाथ होता है। आपकी सफलता के पीछे उनकी मातृशक्ति का कितना योगदान रहा।

सीएम: मेरी सफलता के पीछे मेरी माताजी का बहुत बड़ा योगदान और आशीर्वाद है। मैनें सिर्फ 10 साल की उम्र में पिताजी को खो दिया था। चार भाइयों में सबसे बड़ा था, छोटा भाई तो मात्र 2 महीने का था। ऐसी स्थिति में मां और दादी मां ने परिवार को संभाला। उन्होंने संघर्ष करना सिखाया, जिसके कारण ही मैने कम उम्र से ही जिम्मेदारियों को संभालना शुरू कर दिया। पढ़ाई के साथ ही खेती-बाड़ी और घर-परिवार की जिम्मेदारी संभाली। आज मैं जिस मुकाम पर हूं वह माताजी के संघर्ष और तपस्या का परिणाम है।

सवाल: पत्नी आपके जीवन में क्या बदलाव लेकर आईं, खासतौर पर सार्वजनिक जीवन में?

सीएम: मैं 26 साल की उम्र में विधायक बना था। इसके करीब एक साल बाद शादी हो गई। राजनीति में या प्रशासन में रहने से परिवार के लिए समय कम बचता है। जनसेवा में ज्यादा समय बिताना पड़ता है। उस दौर में मेरी धर्मपत्नी का बहुत बड़ा योगदान था। वह हर तरफ से निश्चिंत कर देती थीं कि आपको लोगों के बीच में उनकी सेवा करना है। घर-परिवार मैं संभाल लूंगी। बच्चों का पालन-पोषण, उनकी शिक्षा, पारिवारिक आयोजन, सामाजिक कार्यक्रम, शादी-ब्याह इन सबका जिम्मा उन्होंने उठाया। एक तरह से सब दायित्वों से निश्चिंत होकर मैं जनसेवा में लगा रहा। देखा जाए तो राजनीतिक जीवन में आगे बढ़ाने में उनका बहुत बड़ा सहयोग मिला।

सवाल: छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तीकरण को लेकर क्या सोचते हैं, हम कहां पर हैं?

सीएम: मेरा एक लंबा राजनीतिक अनुभव है और राज्य निर्माण के बाद हमने प्रारंभिक दौर भी देखा है। उस समय तो महिलाएं घरों से कम ही बाहर निकलती थी। जब किसी कार्यक्रम में हम लोग जाते थे तो देखते थे कि वहां मुश्किल से वही महिलाएं आती थीं जिनके पास कोई दायित्व होता था। मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ और हमारी सरकार बनी फिर यह महिला सोशल सहायता समूह का गठन हुआ और उसके बाद उनको प्रशिक्षित किया गया। उनको आर्थिक रूप से बैंकों से जोड़ा गया। सशक्त किया गया।

सवाल: प्रदेश के मुखिया होने के नाते सारे फैसले तो आप लेते हैं, लेकिन घर पर कौन लेता है?

जवाब: (मुस्कुराते हुए) घर में सामूहिकता होती है। कोई बड़े निर्णय होते हैं तो सब मिलकर ही लेते हैं। मुझे लगता है कि वह आपके घरों में भी होता होगा। देश-प्रदेश के लिए भी सामूहिक निर्णय ही लिए जाते हैं और वही सही भी होते हैं। तो हमारे घर में भी सब मिलकर निर्णय लेते हैं। मां, पत्नी, भाई सब मिलकर कोई निर्णय लेते हैं।

International Women’s Day 2026: सवाल: महिलाओं की दशा-दिशा को बदलने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं।

सीएम: तब से अब जब हम देखते हैं इतने वर्षों में तो आज के कार्यक्रमों में भी सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की होती है। आज महिलाएं बहुत आगे बढ़ चुकी हैं, कई रोजगार भी कर रही हैं। इस दिशा में उनकी मदद कर रहा है जनधन खाता। हमारी सरकार ने उनको बैंक से जोडक़र लोन दिए। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के माध्यम से महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ा। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें अग्रणी बनाने में हमारी महतारी वंदन योजना वरदान साबित हुई।

आज हर महीने 1000 रुपए दे रहे हैं। आज जब मैं किसी कार्यक्रम में जाता हूं तो सभी महिलाएं खुश दिखती हैं। अनेक महिलाएं अपना अनुभव बताती हैं कि हम अपने बच्चे के नाम से सुकन्या समृद्धि योजना का खाता खुलवाए हैं। कोई छोटी-मोटी सब्जी-भाजी की दुकान करती हैं, कोई किराना दुकान चला रही हैं और इससे पूंजी बढ़ी है। कई जगह महिलाएं सिलाई मशीन खरीद कर हर महीने सिलाई-कढ़ाई से अच्छा पैसा अर्जित कर रही हैं। इस तरह से महिला सशक्तीकरण बढ़ा है, विशेषकर हमारा जो जनजातीय कल्चर है उसमें तो पूरा घर परिवार महिलाएं ही चलाती हैं उन्ही के हाथ में पूरा मैनेजमेंट होता है। आज महिलाएं कहां नहीं पहुंचीं। फाइटर प्लेन भी महिलाएं उड़ा रही हैं।

Published on:
08 Mar 2026 01:06 pm
Also Read
View All

अगली खबर