Women Reservation Controversy: कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 543 सीटों पर बिना परिसीमन के 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।
Women Reservation Controversy: छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिला आरक्षण को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद रंजीत रंजन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के साथ “अन्याय” कर रही है और जानबूझकर महिला आरक्षण बिल को लागू करने में देरी की जा रही है।
रंजीत रंजन ने बताया कि 2023 में महिला आरक्षण बिल सर्वसम्मति से पास हो चुका है, इसके बावजूद इसे लागू नहीं किया जा रहा। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार ने इस बिल को जनगणना और परिसीमन जैसी शर्तों से जोड़कर टालने की रणनीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देना चाहती है, तो बिना किसी शर्त के इसे तुरंत लागू करना चाहिए।
उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने 2024 से महिला आरक्षण लागू करने की बात कही थी, लेकिन वर्तमान सरकार इस दिशा में गंभीर नजर नहीं आ रही है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ घोषणा तक सीमित रह गया है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं दिख रही।
कांग्रेस ने 16 अप्रैल को बुलाए गए विशेष सत्र पर भी सवाल उठाए हैं। रंजीत रंजन का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह का सत्र बुलाना केवल “राजनीतिक स्टंट” है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष को बिल की कॉपी सत्र से एक दिन पहले ही दी गई, जिससे उसे पढ़ने और समझने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाया।
कांग्रेस ने महिला आरक्षण को सीटों की संख्या बढ़ाने से जोड़ने पर भी कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। इसके लिए किसी अतिरिक्त प्रक्रिया या शर्त की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि महिला आरक्षण बिल से जनगणना और परिसीमन की शर्त को हटाया जाए और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। पार्टी का कहना है कि महिलाओं को उनका अधिकार देने में देरी करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
इस मुद्दे की गूंज छत्तीसगढ़ में भी साफ सुनाई दे रही है, जहां कांग्रेस नेता लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई प्रमुख महिला नेता भी मौजूद रहीं, जिनमें अनिला भेड़िया, संगीता सिन्हा, चातुरी नंद, अंबिका मरकाम, सावित्री मंडावी, हर्षिता बघेल, शेषराज हरवंश और कविता प्राणलहरे शामिल थीं।
इन नेताओं ने एक स्वर में कहा कि महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। उनका कहना है कि महिलाओं को बराबरी का प्रतिनिधित्व देना लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम है।