Raipur Art Camp: शिविर सुबह के बैच में सुबह 7 से 10 और शाम काे 5 बजे से रात 8 बजे तक लगाया जा रहा है। 100 रुपए रजिस्ट्रेशन शुक्ल के साथ काेई भी व्यक्ति शिविर में ट्रेनिंग ले सकते हैं।
Chhattisgarh Bharthari singing: @ताबीर हुसैन। संस्कृति विभाग का कला प्रशिक्षण शिविर "आकार" का उद्घाटन सोमवार को हुआ। यह प्रशिक्षण शिविर 25 मई से 9 जून तक महंत घासीदास संग्रहालय में परिसर में चलेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्ले आर्ट, बाेनसाई आर्ट, भरथरी गायन, गाेदना शिल्प, टेराकाेटा और क्राेचेट सहित इस शिविर में 16 आधुनिक और पारंपरिक विधाओं की ट्रेनिंग कला विशेषज्ञ दे रहे हैं। पहले दिन विभिन्न विधाओं में लगभग 270 प्रतिभागियाें ने रजिस्ट्रेशन करवाया। क्ले आर्ट में सबसे ज्यादा लगभग 33 एंट्री हुई। शिविर सुबह के बैच में सुबह 7 से 10 और शाम काे 5 बजे से रात 8 बजे तक लगाया जा रहा है। 100 रुपए रजिस्ट्रेशन शुक्ल के साथ काेई भी व्यक्ति शिविर में ट्रेनिंग ले सकते हैं।
लोक कलाकार रिखी छत्री शिविर में छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की ट्रेनिंग देने के साथ उन्हें बनाने की कला भी सिखा रहे हैं। रिखी क्षत्रिय ने बताया कि बिलाईगढ़ क्षेत्र के बरिया आदिवासी समुदाय में प्रचलित खंजनी बाजा अब धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है। यह वाद्य गांवों में देवी-देवताओं की आराधना और संकीर्तन के दौरान बजाया जाता था। वहीं “डांहक” नाम का दुर्लभ वाद्य अपारधी यानी शिकारी समुदाय से जुड़ा माना जाता है। रिखी क्षत्रिय के अनुसार इस वाद्य को महिलाओं द्वारा छूना वर्जित माना जाता है। इसे सालभर देवस्थल में स्थापित कर पूजा की जाती है और नवरात्रि में इसे बजाया जाता है।
इंस्टाग्राम पर लोकप्रिय क्रोशे आर्ट की ट्रेनिंग गुरु सीमा रायजादा द्वारा दी जाएगी। उन्होंने बताया कि आजकल क्रोशे आर्ट युवाओं, खासकर जेन-जी गर्ल्स के बीच काफी ट्रेंड में है और इसे सीखने के लिए बड़ी संख्या में युवा पहुंच रहे हैं। सीमा रायजादा के अनुसार क्रोशे आर्ट को बनाने में समय जरूर लगता है। हाथों से धागों की मदद से तैयार की जाने वाली यह कला बनने के बाद बेहद सुंदर, आकर्षक और क्यूट दिखाई देती है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
भरथरी गायन की विलुप्त होती लोक परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से गुरु प्रांजल राजपूत विशेष प्रशिक्षण देंगे। इस प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक गाथा “भरथरी” को आसान और रोचक तरीके से सिखाया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान राजा भरथरी के राजा से योगी बनने तक की पूरी यात्रा को लोकगायन के माध्यम से समझाया जाएगा। इसमें भरथरी गाथा के प्रमुख 9 प्रसंग शामिल रहेंगे, जिनमें जन्म प्रसंग, जोगी प्रसंग, विरह प्रसंग सहित अन्य महत्वपूर्ण कथाएं सिखाई जाएंगी। साथ ही छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का भी संयोजन किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी इस लोककला से आसानी से जुड़ सके।