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Water Crisis: रायपुर में पानी के लिए ‘पाताल’ तक खुदाई, 1000 फीट नीचे पहुंचा भू-जल, पॉश इलाकों में हाहाकार

Chhattisgarh Water Crisis: रायपुर में गंभीर जल संकट गहराता जा रहा है। सड्डू, मोवा, कचना, सेजबहार और वीआईपी रोड जैसे पॉश इलाकों में भू-जल स्तर 1000 फीट तक पहुंच गया है।

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Water Crisis

छत्तीसगढ़ में 1000 फीट नीचे पहुंचा भू-जल (photo source- Patrika)

Water Crisis: रायपुर, जो तेजी से विकसित हो रही छत्तीसगढ़ की राजधानी है, अब गंभीर जल संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शहर के पॉश और तेजी से विकसित हो रहे आउटर इलाकों में भू-जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में पेयजल संकट और गहराने की आशंका बढ़ गई है। सड्डू, मोवा, कचना, डूंडा, सेजबहार, वीआईपी रोड और दलदल सिवनी जैसे क्षेत्रों में हालात चिंताजनक हो चुके हैं, जहां पिछले 15 वर्षों में भू-जल स्तर करीब 60 प्रतिशत तक गिर चुका है।

Water Crisis: 15 साल में 60% गिरा भू-जल स्तर

विशेषज्ञों के अनुसार वर्ष 2010 में इन इलाकों में 400 से 500 फीट की गहराई पर आसानी से पानी मिल जाता था, लेकिन अब यही पानी 800 से 1000 फीट तक बोरिंग करने के बाद मिल रहा है। कई इलाकों में स्थिति इससे भी बदतर है। सिलतरा में भू-जल स्तर 1500 फीट तक पहुंच चुका है, जो आने वाले समय के लिए बड़ा खतरे का संकेत है।

गर्मी शुरू होते ही टैंकरों पर निर्भर परिवार

रिपोर्ट के मुताबिक आउटर इलाकों में रहने वाले परिवारों को हर साल मार्च से ही पानी के टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। गर्मियों के दौरान स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि अधिकांश परिवारों की पानी की जरूरत केवल टैंकरों से पूरी होती है। इसके लिए हर महीने हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। बारिश के कुछ महीनों को छोड़ दें तो बाकी पूरे साल पानी की किल्लत बनी रहती है।

शहर के भीतरी इलाके भी अछूते नहीं

सिर्फ आउटर इलाके ही नहीं, शहर के भीतर के कई प्रमुख इलाकों में भी भू-जल तेजी से नीचे जा रहा है। सिविल लाइन, तेलीबांधा और वीआईपी रोड जैसे क्षेत्रों में भी हालात बिगड़ रहे हैं। वहीं राजेंद्र नगर और कटोरा तालाब जैसे इलाकों में अब डीप बोरवेल की जरूरत पड़ रही है।

नगर निगम का 186 करोड़ का एक्शन प्लान

बढ़ते संकट को देखते हुए रायपुर नगर निगम ने डूंडा में करीब 186 करोड़ रुपये की लागत से नया फिल्टर प्लांट बनाने की योजना बनाई है। इस परियोजना की शुरुआती तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। यह फिल्टर प्लांट बनने के बाद डूंडा, बोरिया खुर्द, देवपुरी, जोरा, लाभांडी, सेजबहार, अमलीडीह, मोवा, सड्डू, कचना, वीआईपी रोड और अनुपम नगर जैसे क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

हाइड्रोलॉजिस्ट डॉ. विपिन दुबे का कहना है कि रायपुर तेजी से ओवर पॉपुलेटेड शहर बनता जा रहा है। आउटर क्षेत्रों में नई कॉलोनियां तेजी से बस रही हैं और इन कॉलोनियों में पानी का एकमात्र स्रोत भू-जल है। लगातार बोरिंग होने से भू-जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। उन्होंने कहा कि शहर में तालाब पाटे जा रहे हैं और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने में लोगों की रुचि बेहद कम है। ऐसे में पानी जमीन से ज्यादा तेजी से निकाला जा रहा है, जबकि रिचार्ज की गति बहुत कम है।

Water Crisis: रेन वाटर हार्वेस्टिंग अब जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही बड़े स्तर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग लागू नहीं की गई, तो रायपुर को भविष्य में गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। अब समय आ गया है कि विकास के साथ-साथ जल संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाया जा सके।