
भूपेश बघेल का बयान (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Politics: भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ की साय सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मंत्रियों को “रीलबाज” करार दिया। उन्होंने कहा कि “सुशासन तिहार” के नाम पर सरकार केवल दिखावा कर रही है, जबकि जनता महंगाई, खाद संकट और बढ़ती समस्याओं से जूझ रही है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और किसानों को डीएपी-यूरिया नहीं मिलने का मुद्दा उठाते हुए भूपेश ने कहा कि सरकार सिर्फ प्रचार में व्यस्त है, जबकि जनता को राहत और परिणाम चाहिए, रील नहीं।
भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार के मंत्री अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार कर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे सक्रिय हैं, लेकिन इससे आम जनता को कोई फायदा नहीं होने वाला। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “अधिकारियों को गाली देकर आप जनता को बहला नहीं सकते। जनता को रिज़ल्ट चाहिए, रील नहीं।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विकास और सुशासन के नाम पर केवल प्रचार कर रही है, जबकि असल मुद्दों पर कोई ठोस काम नहीं दिख रहा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकार पर महंगाई को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव खत्म हुए अभी महज 12 दिन ही हुए हैं और पेट्रोल-डीजल के दामों में 8 रुपये तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।भूपेश बघेल ने कहा कि “राहुल गांधी पहले ही कह रहे थे कि देश में आर्थिक तूफान आने वाला है, लेकिन उस समय प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के लोग कह रहे थे कि विपक्ष भ्रम फैला रहा है। अब वही मंत्री इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं?”
किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि किसानों को 80 प्रतिशत डीएपी उपलब्ध कराया जाएगा, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि किसी भी सहकारी समिति में जाकर देख लीजिए, किसानों को डीएपी की एक बोरी तक नहीं मिल रही। बाजार में 1300 रुपये की डीएपी 2500 रुपये तक बेची जा रही है, जबकि 266 रुपये की यूरिया 800 से 1000 रुपये प्रति बोरी तक पहुंच गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि खाद की उपलब्धता और कीमतों की स्थिति ऐसी ही रही, तो इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ेगा और उत्पादन भी प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि किसान पहले से आर्थिक दबाव झेल रहे हैं और अब खाद संकट व बढ़ती कीमतें उनकी मुश्किलें और बढ़ा रही हैं।
भूपेश बघेल के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस जहां सरकार को महंगाई, खाद संकट और प्रशासनिक कामकाज को लेकर घेर रही है, वहीं भाजपा सरकार अपने “सुशासन तिहार” अभियान को जनता तक पहुंचाने में जुटी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और अधिक गर्माने के संकेत दे रहा है।
Published on:
26 May 2026 02:18 pm
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