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Petrol-Diesel Crisis: पेट्रोल-डीजल संकट ने बदली लोगों की यात्रा आदतें, छत्तीसगढ़ में अब रेलवे बना आम जनता का सहारा

Petrol-Diesel Crisis: ईंधन की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण लोग अब निजी वाहनों की बजाय ट्रेन और बसों से सफर करना पसंद कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में रेलवे स्टेशनों और बसों में यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है।

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Petrol-Diesel Crisis

Petrol-Diesel Crisis(photo-patrika)

Petrol-Diesel Crisis: छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में ट्रेन और बसों में यात्रियों की संख्या अचानक बढ़ गई है। रायपुर, बिलासपुर, भिलाई, राजनांदगांव, रायगढ़, कोरबा, गोंदिया और कटनी रूट पर चलने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिल रही है। खासकर सुबह और शाम के समय चलने वाली लोकल और पैसेंजर ट्रेनों में यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गई है। रेलवे स्टेशनों पर टिकट काउंटरों के बाहर लंबी लाइनें लगी हुई हैं। कई यात्रियों का कहना है कि वे निजी वाहन से सफर करने की बजाय अब ट्रेन से यात्रा करना ज्यादा सुरक्षित और सस्ता मान रहे हैं। लगातार बढ़ते ईंधन दामों और अनिश्चित आपूर्ति ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।

Petrol-Diesel Crisis: रेलवे स्टेशनों पर बढ़ी हलचल, टिकट काउंटरों पर लंबी कतारें

तेल संकट के चलते रेलवे टिकटों की मांग में अचानक भारी उछाल आया है। रायपुर रेलवे स्टेशन सहित प्रदेश के प्रमुख स्टेशनों पर आरक्षण केंद्रों में सुबह से ही यात्रियों की भीड़ जमा होने लगी। ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई लोग तत्काल टिकट पाने के लिए ट्रैवल एजेंसियों का सहारा ले रहे हैं। मुंबई, दिल्ली, हावड़ा और नागपुर जाने वाली ट्रेनों में सीटों की भारी कमी देखने को मिल रही है।

हावड़ा-मुंबई एक्सप्रेस, समरसता एक्सप्रेस, गोंडवाना एक्सप्रेस और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में मई महीने के अधिकांश दिनों के लिए लंबी वेटिंग शुरू हो चुकी है। कई ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट 50 से 80 तक पहुंच गई है। स्थिति यह है कि यात्रियों को अब जून के अंत तक कन्फर्म टिकट मिलने की उम्मीद दिखाई दे रही है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यदि आने वाले दिनों में ईंधन संकट जारी रहता है, तो अतिरिक्त कोच लगाने और कुछ विशेष ट्रेनों के संचालन पर विचार किया जा सकता है।

बस स्टैंडों पर भी यात्रियों का दबाव, सीटों के लिए मारामारी

रेलवे के साथ-साथ बस सेवाओं पर भी दबाव लगातार बढ़ रहा है। रायपुर से दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर और अन्य जिलों की ओर जाने वाली बसों में यात्रियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। स्थिति यह है कि कई बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं बच रही। यात्री घंटों पहले बस स्टैंड पहुंचकर सीट सुरक्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।

निजी बस ऑपरेटरों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में यात्रियों की संख्या में अचानक 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।कुछ मार्गों पर बस किराए में भी हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। हालांकि प्रशासन ने परिवहन विभाग को किराए पर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं ताकि यात्रियों से अधिक वसूली न हो सके।

कारोबारी वर्ग भी रेलवे पर हुआ निर्भर

तेल संकट का असर केवल आम यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार और परिवहन व्यवस्था भी इससे प्रभावित हो रही है। डीजल महंगा होने और ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने के कारण व्यापारी अब रेलवे पार्सल सेवा का अधिक उपयोग कर रहे हैं। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग के रेलवे पार्सल कार्यालयों में बुकिंग की संख्या अचानक बढ़ गई है।

छोटे और मध्यम कारोबारी अपने सामान को कम लागत में और समय पर पहुंचाने के लिए रेलवे की ओर रुख कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि सड़क परिवहन की तुलना में रेलवे फिलहाल ज्यादा भरोसेमंद साबित हो रहा है। खासकर किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स और दैनिक उपयोग की वस्तुओं के परिवहन में रेलवे की मांग तेजी से बढ़ी है।

यात्रियों की बढ़ती परेशानी, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित

ईंधन संकट का सबसे बड़ा असर नौकरीपेशा लोगों और छात्रों पर पड़ रहा है। रोजाना निजी वाहन से यात्रा करने वाले लोग अब ट्रेन और बसों पर निर्भर हो गए हैं। इससे सार्वजनिक परिवहन में भीड़ बढ़ने के साथ यात्रा का समय भी लंबा हो गया है। कई यात्रियों ने बताया कि पहले जहां वे एक घंटे में अपने गंतव्य तक पहुंच जाते थे, वहीं अब भीड़ और देरी के कारण उन्हें दो से तीन घंटे तक का समय लग रहा है। लोकल ट्रेनों में भीड़ के कारण यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन और बस स्टैंड पर अव्यवस्था की स्थिति बनने लगी है।

सरकार और प्रशासन की बढ़ी चिंता

तेल संकट के कारण बढ़ती भीड़ और परिवहन व्यवस्था पर दबाव को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। रेलवे और परिवहन विभाग हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, यदि संकट लंबा खिंचता है तो अतिरिक्त बसें चलाने, लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और कुछ विशेष रेल सेवाएं शुरू करने पर विचार किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति लोगों को सार्वजनिक परिवहन के महत्व का एहसास करा रही है। हालांकि यदि ईंधन संकट जल्द समाप्त नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में परिवहन व्यवस्था पर और अधिक दबाव बढ़ सकता है।

आम जनता के लिए रेलवे बनी राहत की उम्मीद

वर्तमान हालात में रेलवे आम लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत बनकर सामने आई है। कम किराया, अपेक्षाकृत सुरक्षित यात्रा और लंबी दूरी तक बेहतर कनेक्टिविटी के कारण लोग बड़ी संख्या में रेल सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं। तेल संकट ने यह भी साबित कर दिया है कि देश की परिवहन व्यवस्था में रेलवे की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में यदि हालात सामान्य नहीं हुए, तो ट्रेनों और बसों में यात्रियों की भीड़ और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।