रायपुर

World Population Day 2026: छत्तीसगढ़ में बेटियां राष्ट्रीय औसत से बेहतर, लेकिन औद्योगिक जिलों में बिगड़ रही तस्वीर

Demographic Report: विश्व जनसंख्या दिवस पर जारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ का लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों पर 991 है, जो राष्ट्रीय औसत 943 से बेहतर है।
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Jul 11, 2026
World Population Day 2026
विश्व जनसंख्या दिवस (photo source- Patrika)

@पीलूराम साहू/प्रदेश में बेटियों की स्थिति राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है, लेकिन प्रदेश के औद्योगिक जिलों की जमीनी हकीकत चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही है। 'विश्व जनसंख्या दिवस' के मौके पर की गई पड़ताल के अनुसार, छत्तीसगढ़ में प्रति 1000 पुरुषों पर 991 महिलाएं हैं, जो राष्ट्रीय औसत (943) से कहीं आगे है। हालांकि, इस औसत के भीतर झांकने पर दो अलग-अलग तस्वीरें नजर आती है।

एक तरफ जहां बस्तर के आदिवासी जिलों में बेटियां बेटों से ज्यादा हैं, वहीं दुर्ग, रायगढ़ और कोरबा जैसे विकसित व औद्योगिक जिलों में यह ग्राफ 950 से भी नीचे खिसक गया है। इसके विपरीत, मैदानी और औद्योगिक जिलों की स्थिति चिंता पैदा करती है। दुर्ग में लिंगानुपात 946, रायगढ़ में 959 और कोरबा में 961 तक गिर चुका है। सबसे डरावनी स्थिति शहरी क्षेत्रों के बाल लिंगानुपात (0-6 वर्ष) की है, जो खिसककर 918 पर आ गया है।

Female Sex Ratio: बस्तर में आंकड़ा 1000 के पार

प्रदेश की कुल आबादी में 32 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों में लिंगानुपात की सबसे सुखद तस्वीर है। बस्तर में प्रति 1000 पुरुषों पर 1003, दंतेवाड़ा में 1002 और नारायणपुर में 1001 महिलाएं हैं। समाजशास्त्रियों के मुताबिक, आदिवासी समाज में दहेज प्रथा का न होना, मातृसत्तात्मक परंपराएं, सामूहिक जीवनशैली और बेटियों का खेती व घर दोनों संभालना इसकी मुख्य वजह है। यही कारण है कि इन जिलों में 0-6 आयु वर्ग का बाल लिंगानुपात भी 970 से ऊपर है।

Population Statistics: राष्ट्रीय औसत से पीछे

रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में डिलीवरी) 90 फीसदी से अधिक होने और मितानिनों की सक्रियता से मातृ मृत्यु दर 159 से घटकर 132 (प्रति लाख) पर आ गई है। हालांकि, देश में छत्तीसगढ़ अब भी पांचवें स्थान पर है और राष्ट्रीय औसत (93) से काफी पीछे है। वहीं, शिशु मृत्यु दर 77 से घटकर 38 (प्रति हजार) हो गई है, लेकिन राज्य इस सूची में देश में दूसरे स्थान पर है।

शिशु मृत्युदर में हम दूसरे स्थान पर

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत न होने के कारण शिशु मृत्यु दर में हम दूसरे स्थान पर हैं। इसे कम करने के लिए पीडियाट्रिशियन की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ अस्पतालों में एनआईसीयू और पीआईसीयू वार्डों को और अधिक विकसित करना होगा- पद्मश्री डॉ. एटी दाबके, रिटा. कुलपति व सीनि. पीडियाट्रिशियन

Updated on:
11 Jul 2026 08:39 am
Published on:
11 Jul 2026 08:36 am