रायपुर

45 लाख का बैंक घोटाला… आखिर कैसे निकली रकम? DCB Bank मैनेजर गिरफ्तार, फर्जी चेक से हुआ बड़ा खेल

Crime News: रायपुर के गोबरा नवापारा में सामने आए लगभग 45 लाख रुपए के बहुचर्चित बैंक घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी बैंक मैनेजर उत्कर्ष वर्मा को गिरफ्तार कर लिया है।

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Mar 01, 2026
DCB Bank मैनेजर गिरफ्तार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG Crime News: रायपुर के गोबरा नवापारा में सामने आए लगभग 45 लाख रुपए के बहुचर्चित बैंक घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी बैंक मैनेजर उत्कर्ष वर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। कड़ी पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया। मामले में आर्थिक अपराध की गंभीर धाराओं के तहत जांच तेज कर दी गई है।

पीड़ित राकेश कंसारी के अनुसार, उनके परिवार के 9 खाते डीसीबी बैंक में संचालित हैं। आरोप है कि 6 खातों से “लूज चेक” के जरिए फर्जी हस्ताक्षर कर करीब एक वर्ष में सुनियोजित ढंग से लगभग 45 लाख रुपए निकाल लिए गए। इस खुलासे के बाद शहर में हड़कंप मच गया है।

बीमा पॉलिसियों में भी खेल

मामले में नया मोड़ तब आया जब Aditya Birla Insurance से जुड़ी 41 पॉलिसियों में कथित रूप से ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर बदल दिए गए। इसके बाद लगभग 16 लाख रुपए का लोन निकालने का आरोप है। इतना ही नहीं, पीड़ित की माता हाटों बाई कंसारी के नाम से ओवरड्राफ्ट सुविधा का उपयोग कर 27 से 28 लाख रुपए का टर्नओवर कर राशि निकाले जाने की बात भी सामने आई है।

7 महीने तक शिकायत, फिर भी देरी?

पीड़ित का कहना है कि बैंक के वरिष्ठ अधिकारी दुर्गा रथ को करीब 7 महीने पहले पूरे मामले की जानकारी दी गई थी, लेकिन 10 फरवरी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 12 फरवरी को थाना, आईजी कार्यालय और एंटी करप्शन ब्यूरो में लिखित शिकायत दी गई, तब जाकर पुलिस हरकत में आई।

कथित स्वीकारोक्ति की जांच

आरोपी मैनेजर ने कथित रूप से 14 लाख 30 हजार रुपए में से 10 लाख खाते में जमा करने और 4 लाख 30 हजार रुपए नगद देने की बात कही है। हालांकि पुलिस इस दावे की भी गहन जांच कर रही है।

अन्य खातों की भी पड़ताल

नगर में चर्चा है कि 20 से 25 अन्य खातों में भी इसी प्रकार की अनियमितता हो सकती है। पुलिस बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, हस्ताक्षर सत्यापन और डिजिटल ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच कर रही है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर धारा 3(5)-BNS, 316(5)-BNS, 318(4)-BNS, 336(3)-BNS, 338-BNS, 340(2)-BNS, 61(2)-BNS के तहत आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।अगर आरोप साबित होते हैं तो यह सिर्फ एक मैनेजर की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि बैंकिंग निगरानी तंत्र की बड़ी नाकामी का खुलासा

Published on:
01 Mar 2026 07:22 pm
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