रायपुर

पीजी सीट की मान्यता का निरीक्षण करने दिल्ली से आई टीम, पर कॉलेज के डीएमइ को पता ही नही

शासकीय डेंटल कॉलेज पीजी सीट को मान्यता दी जाए या नहीं, इसका कर देर शाम डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम दिल्ली लौट गई

2 min read
Oct 13, 2018
पीजी सीट की मान्यता का निरीक्षण करने दिल्ली से आई टीम, पर कॉलेज के डीएमइ को पता ही नही

रायपुर . प्रदेश के इकलौते शासकीय डेंटल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) सीट को मान्यता दी जाए या नहीं, इसका दो दिवसीय निरीक्षण कर शुक्रवार की देर शाम डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआइ) की टीम दिल्ली लौट गई। वहीं, डेंटल कॉलेज के डीएमइ अशोक चंद्राकर को इसकी जानकारी ही नहीं है।

गौरतलब है कि 2003 से संचालित शासकीय डेंटल कॉलेज कई सालों से पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) सीट की मान्यता के लिए प्रयास कर रहा है। पिछली बार जब डीसीआइ टीम पहुंची थी तो उम्मीद जगी थी कि मान्यता मिल जाएगी और इस सत्र से पढ़ाई प्रारंभ हो जाएगी। डीसीआइ टीम ने डेंटल कॉलेज में ऑपरेशन थियेटर नहीं होने, मरीजों का वार्ड शुरू नहीं होने आदि कुछ खामियां बताकर मान्यता देने से इनकार कर दिया।

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डीसीआइ टीम ने जताई संतुष्टि : डेंटल कॉलेज में पोस्ट ग्रेजुएशन सीट की मान्यता मिलने के इस बार आसार जग गए हैं। क्योकि, दो दिवसीय दौरे पर पहुंची डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया की टीम ने डेंटल कॉलेज में मौजूद व्यवस्थाओं पर संतुष्टि जताई है। हालांकि, सीट की मान्यता के लिए प्रबंधन को कुछ दिन इंतजार करना पड़ेगा, क्योकि दिल्ली जाकर डीसीआइ की टीम मान्यता दी जाए या नहीं, इस पर फैसला करेगी।

गुरुवार और शुक्रवार को टीम ने ओरल एंड मैग्जिलो फिसियल सर्जरी, पेरियो डोन्टिक्स, ऑर्थो डोन्टिक्स, प्रोस्थो डोन्टिक्स, ओरल पैथोलॉजी और कन्सर्वेटिव डेन्टिस्ट्री का निरीक्षण कर प्रोफेसरों की हेड काउंटिंग, कर्मचारियों की मौजूदगी तथा सुविधाओं को देखकर रिपोर्ट तैयार किया। शुक्रवार की देर शाम डीसीआइ की टीम रिपोर्ट लेकर दिल्ली रवाना हो गई।

गौरतलब है कि वर्ष-2003 से शुरू हुए डेंटल कॉलेज में अभी तक बीडीएस पाठ्यक्रम ही संचालित हो रहा है। जबकि, प्रदेश में पांच निजी डेंटल कॉलेजों को काफी पहले ही पीजी की मान्यता मिल चुकी है।

30-40 लाख खर्च करने पड़ते हैं छात्रों को
बताया जाता है कि डेंटल कॉलेज के एक विभाग में अधिकतम पीजी की ६ सीटें की ही मान्यता मिल सकती है। डेंटल कॉलेज के ६ विभागों का निरीक्षण टीम ने किया है, उम्मीद है कि कम से कम तीन विभागों में पीजी की मान्यता मिल जाएगी।

बताया जाता है कि डेंटल कॉलेज में पीजी की मान्यता नहीं होने के छात्रों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। छात्रों को निजी संस्थानों से पीजी करने पर 30 से 40 लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं, जबकि सरकारी कॉलेजों से करने पर एक से दो लाख में कोर्स पूरा हो जाता है।

चिकित्सा शिक्षा के संचालक डॉ. ए.के. चंद्राकर ने कहा कि टीम के बारे में जानकारी नहीं है। कॉलेज में जाकर पता करिए। मै, डायरेक्ट्रेट में बैठा हूं, बहुत सारी बैठकें होती है, मुझे नहीं मालूम।

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Published on:
13 Oct 2018 10:16 am
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