
रायपुर@ विनोद जैन। Fake Doctors: गोबरा नवापारा क्षेत्र में फर्जी चिकित्सकों की बढ़ती गतिविधियों और महंगे इलाज से परेशान लोगों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि गांवों, कस्बों और शहरों के सभी अस्पतालों एवं क्लीनिकों में चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) नंबर, विशेषज्ञता तथा संबंधित लाइसेंस की जानकारी स्पष्ट रूप से बोर्ड पर प्रदर्शित की जाए, ताकि मरीज इलाज शुरू कराने से पहले आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकें।
लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर कुछ लोग स्वयं को डॉक्टर बताकर विभिन्न बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। ऐसे मामलों में मरीजों का लंबे समय तक उपचार करने के बाद, जब उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है, तब उन्हें बड़े शहरों के अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। इससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सभी निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में पंजीकरण प्रमाणपत्र, नर्सिंग होम लाइसेंस तथा अन्य आवश्यक वैधानिक दस्तावेज प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित किए जाएं। साथ ही चिकित्सकों को जेनेरिक दवाएं लिखने को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि मरीजों को कम लागत में गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो सके। लोगों का कहना है कि सरकार को नियमित निरीक्षण अभियान चलाकर फर्जी चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
सुरेंद्र साहू, सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, "जिस प्रकार दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाते हैं, उसी प्रकार अस्पतालों और क्लीनिकों में भी डॉक्टरों की शैक्षणिक योग्यता और पंजीकरण नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होना चाहिए। इससे मरीज सही चिकित्सक का चयन कर सकेंगे और फर्जी डॉक्टरों पर स्वतः अंकुश लगेगा।"
योगेश कंसारी, बर्तन व्यवसायी ने कहा, "इलाज कराने आने वाला हर मरीज सबसे पहले डॉक्टर की योग्यता जानना चाहता है। यदि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगी तो मरीजों का विश्वास बढ़ेगा और अनावश्यक भ्रम की स्थिति समाप्त होगी।"
नूतन साहू ने कहा, "सरकार को समय-समय पर निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का निरीक्षण करना चाहिए। जिन चिकित्सकों का पंजीकरण नहीं है या जो नियमों का उल्लंघन करते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।"
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मिथलेश चौधरी ने कहा, "अस्पतालों और क्लीनिकों में चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता, पंजीकरण नंबर तथा अन्य आवश्यक जानकारी मरीजों की सुविधा और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता के लिए प्रदर्शित की जानी चाहिए। इससे मरीजों को सही जानकारी मिलेगी और उनका स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति विश्वास भी मजबूत होगा। इस संबंध में सभी निजी अस्पतालों एवं क्लीनिकों को आवश्यक निर्देश जारी करने के लिए पत्र भेजा जाएगा। स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रत्येक मरीज का अधिकार है।"