
Chhattisgarh News: प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव की आहट के साथ ही सियासी गतिविधियां तेज होने लगी हैं। चार नगर निगम समेत 15 नगरीय निकायों में होने वाले चुनाव को लेकर राज्य शासन और राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां बढ़ा दी हैं। सरकार ने भी चुनाव वाले निकायों में विकास कार्यों को लेकर फोकस बढ़ा दिया है। ज्यादा से ज्यादा राशि जारी कर विकास कार्यों के लिए निकायों को दे रहे है। वहीं भाजपा और कांग्रेस दोनों में संभावित प्रत्याशियों को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
बीरगांव, भिलाई, भिलाई-चरौदा और रिसाली नगर निगम के अलावा पांच नगर पालिका परिषद और छह नगर पंचायतों में चुनाव होना है। इन निकायों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग स्तर पर तैयारियों की समीक्षा के साथ वार्ड आरक्षण और अन्य प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। फिलहाल चुनाव की तारीख की घोषणा नहीं हुई है।
चुनाव वाले निकायों में सरकार की गतिविधियां भी बढ़ती नजर आ रही हैं। मंत्रियों के कार्यक्रम लगातार हो रहे हैं और स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों तथा सरकारी योजनाओं की समीक्षा पर जोर दिया जा रहा है। हाल ही में खैरागढ़ में मंत्री लखन लाल देवांगन ने सेवा संकल्प अभियान की तैयारियों और गतिविधियों की समीक्षा की। वहीं नगरीय प्रशासन से जुड़े विषयों पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी समीक्षा बैठक कर चुके हैं। सितंबर में चल रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विभिन्न जिलों में कार्यक्रम भी तय किए गए हैं। इससे चुनाव वाले क्षेत्रों में सरकार और संगठन की सक्रियता और बढ़ी है।
चुनावी तैयारियों के साथ भाजपा और कांग्रेस में टिकट के दावेदार भी सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस ने चार नगर निगम समेत 15 निकायों के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर संगठनात्मक स्तर पर प्रक्रिया शुरू कर दी है। भाजपा में भी स्थानीय नेताओं, पूर्व जनप्रतिनिधियों और संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ी है।
जिन वार्डों में महिला आरक्षण हुआ है, वहां राजनीतिक परिवारों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। कई संभावित पुरुष दावेदार अब अपनी पत्नी या मां को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में आरक्षण के साथ-साथ परिवार और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव भी टिकट वितरण में महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।