
रायपुर. छत्तीसगढ़ का सियासी संग्राम का बिगुल बज चुका है। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। आचार सहित के दौरान राजनीति पार्टियों को निर्वाचन आयोग के इन कड़े नियामों को पालन करना होता है। अगर नेता इन नियमों का उल्लंघन करता है निर्वाचन आयोग सख्ती से कार्रवाई करती है। फिर चाहे वो सीएम पद के लिए घोषित प्रत्याशी ही क्यों न हो। सबसे पहले निर्वाचन के नियमों का पालन करन सभी प्रत्याशियों का पहला कत्र्तव्य होता है। जानिए आप कैसे पता लगाएंगे कि आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन हो रहा है या नहीं...
- शासकीय खर्च में लगाए गए समस्त होल्डिंग व प्रचार सामग्री हटा दिए जाएंगे।
-शासकीय खर्च पर कोई भी विज्ञापन जारी नहीं किए जाएंगे।
- मतदान के लिए मंदिर, मस्जिद और चर्च में अपील नहीं कर सकते।
- धर्म और जाति के नाम पर वोट नहीं मांगे जा सकते।
- नई सरकारी घोषणाओं पर पाबंदी
- यदि कोई मंत्री चुनाव के कार्य से भ्रमण करते हैं, तो शासकीय कर्मचारी तथा अधिकारी उनके साथ नहीं जाएंगे।
- कोई भी शासकीय कर्मचारी किसी राजनीतिक आन्दोलन में न तो भाग लेगा न उनकी सहायता के लिए चन्दा देगा और न ही किसी प्रकार का सहयोग देगा।
- चुनाव कार्य में लगे लाउडस्पीकर का प्रयोग रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रतिबंधित रहेगा।
- सरकारी एवं गैर सरकारी भवनों तथा निजी भवनों में भवन मालिक के अनुमति के बिना प्रत्याशी निर्वाचन संबंधी पोस्टर लगाना व नारा लिखने नहीं कर सकते।
आचार संहिता टूटे तो यहां करें शिकायत
राज्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय या फिर जिला निर्वाचन कार्यालय में जाकर सीधे शिकायत की जा सकती है। इसके अलावा निर्वाचन आयोग ने 'सी विजिलÓ नाम से एप लांच किया है, जहां आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत की जा सकती है। शिकायत पर निर्वाचन विभाग के अधिकारियों को मौके पर पहुंचना होगा। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। इस ऐप को प्लेयस्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है।