रायपुर

सरकार का बड़ा आदेश, अब किसी भी राज्य के डॉक्टर छत्तीसगढ़ में कर सकेंगे नौकरी और प्रैक्टिस, जानें नया नियम

Doctors Practice in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ सरकार ने डॉक्टरों के लिए बड़ा नियम बदलाव किया है। अब देश के किसी भी राज्य में पंजीकृत डॉक्टर छत्तीसगढ़ में बिना अतिरिक्त स्थानीय रजिस्ट्रेशन के नौकरी और प्रैक्टिस कर सकेंगे।

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Jun 14, 2026
New Rules for Doctors
CG में डॉक्टरों की सीधी एंट्री: New Rules for Doctors (फोटो सोर्स: iStock)

रायपुर@पीलूराम साहू। Chhattisgarh Doctors New Rule: प्रदेश में प्रेक्टिस या नौकरी करने के लिए देश के किसी भी राज्य के डॉक्टरों को छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। अभी तक यह अनिवार्य था। स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया के नाम से यह अधिसूचना जारी हुई है। नया नियम नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ के लिए भी लागू होगा।

जारी अधिसूचना में कहा गया है कि नर्सिंग होम अधिनियम 2010 के अनुसार किसी भी डॉक्टर, नर्स या पैरामेडिकल स्टाफ का भारत के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में पंजीयन होना चाहिए। यह पंजीयन राज्य चिकित्सा परिषद (एसएमसी), राज्य नर्सिंग परिषद व राज्य पैरामेडिकल परिषद या राष्ट्रीय चिकित्सा रजिस्टर (एनएमआर) में होना चाहिए। यही नहीं भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अन्य राष्ट्रीय रजिस्टर में विधिवत पंजीकृत हैं, छत्तीसगढ़ राज्य के भीतर प्रैक्टिस करने के पात्र होंगे।

Doctors Registration Rule: नई अधिसूचना के बाद यह आदेश शून्य

अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि छत्तीसगढ़ चिकित्सा परिषद से किसी अतिरिक्त अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। जानकारों के अनुसार शासन का यह आदेश प्रदेश में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए है। किसी भी राज्य के डॉक्टर आए तो यहां आराम से प्रैक्टिस करें या नौकरी करें।

अभी निजी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में पड़ोसी राज्यों के डॉक्टर आकर नौकरी कर रहे हैं। पहले सीजीएमएससी ने सभी सीएमएचओ को पत्र लिखकर दूसरे राज्यों से आए डॉक्टरों को अनिवार्य रूप से पंजीयन कराने को कहा था। अब नई अधिसूचना के बाद यह आदेश शून्य हो गया है।

वेरिफिकेशन कैसे होगा, यह बड़ा सवाल

दूसरे राज्यों से आए डॉक्टरों की डिग्री का वेरिफिकेशन कैसा होगा, यह बड़ा सवाल है। मध्यप्रदेश समेत राजस्थान में डॉक्टरों की फर्जी डिग्री का मामला आया है। जानकारों का कहना है कि जब कोई डॉक्टर पंजीयन कराता है तो उनकी डिग्री का वेरिफिकेशन किया जाता है। चूंकि दूसरे राज्यों से डॉक्टर आएंगे तो उन्हें स्टेट मेडिकल काउंसिल से कोई लेना-देना ही नहीं रहेगा। वे यहां आकर क्लीनिक भी खोल सकते हैं और अस्पताल भी चला सकते हैं, लेकिन डिग्री का वेरिफिकेशन करने वाला यहां कोई नहीं होगा।

शासन के आदेश की जानकारी है, लेकिन यहां नहीं पहुंचा है। डॉक्टरों की उपलब्धता के लिहाज से यह निर्णय लेने की संभावना है। राष्ट्रीय स्तर पर सेंट्रल रजिस्ट्रेशन की तैयारी की जा रही है। यहां भी डॉक्टरों का 5 साल में रिनुअल कराने की योजना है। इससे पता चल जाएगा कि किस डॉक्टर की डिग्री सही है या नहीं। - डॉ. रूपल पुरोहित, रजिस्ट्रार छग मेडिकल काउंसिल

Published on:
14 Jun 2026 08:01 am