रायपुर

मंच से डांट-फटकार पर बवाल! मंत्री-विधायकों के व्यवहार से नाराज कर्मचारी, बोले- अपमान बंद नहीं हुआ तो उतरेंगे सड़क पर

Sushasan Tihar 2026: छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक मंचों से फटकारे जाने के मामलों पर विवाद गहरा गया है। अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने इसे अपमानजनक बताते हुए नाराजगी जताई है और चेतावनी दी है कि यदि ऐसी घटनाएं नहीं रुकीं तो कर्मचारी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

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Jun 05, 2026
Sushasan Tihar 2026
Sushasan Tihar 2026(photo-patrika)

Sushasan Tihar 2026: छत्तीसगढ़ में सुशासन तिहार के दौरान मंचों से अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाए जाने के मामलों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे को लेकर अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी दी है। फेडरेशन का कहना है कि जनता के बीच किसी कर्मचारी को अपमानित करना उचित नहीं है और यह प्रशासनिक व्यवस्था के मनोबल को प्रभावित करता है। वहीं सरकार की ओर से मंत्रियों ने कहा है कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की समस्याओं को उठाना और जवाबदेही तय करना है। इस मुद्दे पर अब कर्मचारी संगठनों और जनप्रतिनिधियों के बीच बहस तेज हो गई है।

Sushasan Tihar 2026: मंच से फटकार पर कर्मचारी संगठनों की नाराजगी

अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने कहा कि हाल के दिनों में कई कार्यक्रमों के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक मंच से फटकार लगाई गई है। फेडरेशन का मानना है कि यदि किसी कर्मचारी से गलती हुई है तो उसके लिए विभागीय प्रक्रिया मौजूद है, लेकिन सार्वजनिक रूप से अपमानित करना उचित नहीं है।

फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया और रील बनाने के दौर में कुछ लोग लोकप्रियता हासिल करने के लिए कर्मचारियों को निशाना बना रहे हैं। इससे कर्मचारियों का मनोबल टूटता है और कार्य संस्कृति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

‘रीलबाजी के लिए अपमान बर्दाश्त नहीं’

कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी कर्मचारी के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि पांच साल के लिए चुने जाते हैं, जबकि कर्मचारी पूरी सेवा अवधि तक शासन-प्रशासन की जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसलिए दोनों पक्षों के बीच सम्मान और समन्वय बना रहना जरूरी है। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि सार्वजनिक मंचों से कर्मचारियों को अपमानित करने की घटनाएं नहीं रुकीं तो प्रदेशभर के कर्मचारी आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।

डिप्टी सीएम अरुण साव ने क्या कहा

इस पूरे विवाद पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने संतुलित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार आचरण सभी को करना चाहिए, चाहे वह अधिकारी हो, कर्मचारी हो या जनप्रतिनिधि। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सभी पक्षों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अरुण साव के बयान को सरकार की ओर से समन्वय स्थापित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय जवाबदेही और अनुशासन पर जोर दिया।

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब का जवाब

कर्मचारी संगठनों की आपत्ति पर मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का मुख्य कर्तव्य जनता के हक और अधिकारों के लिए आवाज उठाना है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं जनता की समस्या है तो जनप्रतिनिधि उसका समाधान कराने के लिए अधिकारियों से जवाब मांगेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे रीलबाजी या लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मंत्री के अनुसार जनप्रतिनिधि और अधिकारी दोनों का लक्ष्य जनता की सेवा है, इसलिए दोनों को आपसी सामंजस्य के साथ काम करना चाहिए।

बढ़ सकता है विवाद

कर्मचारी फेडरेशन की चेतावनी के बाद यह मामला और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। एक ओर कर्मचारी सम्मानजनक व्यवहार की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर जनप्रतिनिधि जवाबदेही तय करने को अपना अधिकार बता रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार इस विवाद को कैसे सुलझाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। फिलहाल सुशासन तिहार के बीच शुरू हुआ यह विवाद प्रदेश की प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चाओं का बड़ा विषय बन गया है।

Updated on:
05 Jun 2026 02:51 pm
Published on:
05 Jun 2026 02:50 pm