
NEET Counselling 2026: प्रदेश में इस साल एमबीबीएस की एकमुश्त 595 सीटें बढ़ी हैं। इसके बावजूद कटऑफ गिरने के बजाय बढ़ जाएगा। दरअसल इस बार नीट का रिजल्ट हाई स्कोर वाला रहा है। प्रदेश के दो टॉपरों को संयुक्त रूप से 690-690 अंक मिले हैं। जबकि पिछले साल ऑल इंडिया टॉपर को 684 अंक मिले थे। तब नीट यूजी का परचा काफी कठिन था और कटऑफ काफी गिर गया था। पिछले साल 474 अंक वाले को सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल गया था। नीट का रिजल्ट आने के बाद अगले माह के अंत तक काउंसिलिंग शुरू होने की संभावना है।
प्रदेश में 5 सरकारी व एक निजी मेडिकल कॉलेज को मान्यता मिली है। इनमें 350 सीटें मिली हैं। चालू सत्र के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, गीदम व कुनकुरी को मान्यता मिली है। वहीं, निजी में बालाजी ग्रुप के मां पद्मावती को एमबीबीएस की 100 सीटों की मान्यता मिली है। सरकारी कॉलेजों में 50-50 के हिसाब से 250 सीटें बढ़ी हैं। जबकि नेहरू मेडिकल कॉलेज में 20, जगदलपुर में 25, रिम्स में 100, अभिषेक व रावतपुरा कॉलेज में 50-50 सीटें बढ़ी हैं।
यानी नए कॉलेजों को 350 सीटें मिली हैं और पुराने कॉलेजों में 245 सीटें बढ़ी हैं। प्रदेश से नीट में 45 हजार के आसपास छात्र शामिल हुए। करीब 22 हजार छात्र क्वालिफाइड हुए हैं। केंद्र सरकार ने पिछले आम बजट में 2025 में 10 हजार व अगले 5 साल में 75 हजार एमबीबीएस सीटें बढ़ाने की घोषणा की थी। इसका फायदा छत्तीसगढ़ को मिला है।
2024 में निजी कॉलेज में सबसे हाई स्कोर 653 वाली छात्रा ने प्रवेश लिया। जबकि इससे कम 579 नीट स्कोर वाले छात्र को सरकारी मेडिकल कॉलेज में ईडब्ल्यूएस कोटे की सीट मिली थी। निजी कॉलेजों में ऐसे 75 से ज्यादा छात्र थे, जिनका स्कोर सरकारी कॉलेज में प्रवेश लेने वाले छात्रों से ज्यादा था। हमेशा से ट्रेंड रहा है कि जिन्हें सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट नहीं मिल पाती, वे निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेते हैं। इसके कारण कट ऑफ भी सरकारी से कम जाता है। निजी मेडिकल कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटे में दूसरे राज्यों के छात्र प्रवेश ले सकते हैं। हाई कट ऑफ वाले छात्र दूसरे राज्यों के हैं, जिनमें मध्यप्रदेश प्रमुख है।
निजी कॉलेजों में एनआरआई कोटे की सीटों पर पिछले साल 720 में 113 स्कोर वाले का एडमिशन हो गया। वर्तमान में एनआरआई कोटा स्पांसरशिप हो गया है। इसके कारण कोई भी एनआरआई प्रदेश में रहने वाले को परिचित व रिश्तेदार बताकर एनआरआई बना देता है। हालांकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों व काॅलेज प्रबंधनों का दावा है कि एडमिशन नीट स्कोर व मेरिट के अनुसार होता है।
फीस बढ़ाने की मांग कर रहे कॉलेज
कुछ निजी कॉलेजों ने 2024 में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर सालाना फीस 25 लाख करने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने फीस बढ़ाने का अधिकार फीस विनियामक कमेटी को दे दिया। कमेटी ने फीस बढ़ाने से इनकार कर दिया। उनका तर्क है कि छत्तीसगढ़ में प्रति व्यक्ति आय कम है। पड़ोसी राज्यों से तुलना करते हुए फीस तय की गई है। जबकि कॉलेजों का कहना है कि दूसरे राज्यों की तुलना में यहां फीस काफी कम है। ऐसे में फीस बढ़ाने की जरूरत है।
प्रदेश में सीटें बढ़ने से कटऑफ कम होने के बजाय बढ़ेगा। दरअसल इस बार रिजल्ट हाई स्कोर गया है। स्टेट टॉपर को अगर 720 में 690 अंक मिले हैं तो ये हाई स्कोरिंग मार्क्स है। पिछले साल ऑल इंडिया टॉपर को 684 अंक मिले थे। नीट के रिजल्ट के पहले सीटें बढ़ने से लग रहा था कि कट ऑफ गिरेगा, लेकिन हाई स्कोर के कारण यह बढ़ेगा। सरकारी में ऑल इंडिया में सबसे पहले व बाद में स्टेट, मैनेजमेंट व एनआरआई कोटे की सीटों पर एडमिशन दिया जाता है। एडमिशन पूरी तरह पारदर्शी है-डॉ. देवेंद्र नायक, चेयरमैन बालाजी मेडिकल कॉलेज
नीट का रिजल्ट आने के बाद काउंसिलिंग की तैयारी शुरू कर दी गई है। अभी एनटीए से प्रदेश के रिजल्ट की सीडी नहीं आई है। ऑल इंडिया कोटे का काउंसिलिंग शेड्यूल जारी होने के बाद स्टेट की सीटों को भरा जाएगा। इसके लिए पूरी काउंसिलिंग का शेड्यूल जारी किया जाएगा- डॉ. यूएस पैकरा, डीएमई