
रायपुर@ताबीर हुसैन। NEET-UG 2026: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 के रद्द होने के बाद लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के सामने अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। पेपर लीक के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) ने 12 मई को परीक्षा रद्द करने की घोषणा की थी। इसके बाद से छात्रों के बीच तनाव, निराशा और भविष्य को लेकर चिंता का माहौल देखा जा रहा है।
एनटीए ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया है। एजेंसी के अनुसार विद्यार्थियों को दोबारा पंजीकरण नहीं करना होगा, कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा और पूर्व में भरी गई जानकारी तथा परीक्षा केंद्र मान्य रहेंगे। री-एग्जाम 21 जून को आयोजित किया जाएगा। बता दें कि दिल्ली, राजस्थान और महाराष्ट्र से नीट अभ्यर्थियों की खुदकुशी की खबरें आई थीं।
छत्तीसगढ़ सहित देशभर में हजारों विद्यार्थी इस परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा रद्द होने के बाद कई राज्यों से छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसे दुखद कदम उठाने की खबरें भी सामने आई हैं, जिसने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से अपील की है कि वे अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय परिवार, मित्रों, शिक्षकों या काउंसलर से खुलकर बात करें। उनका मानना है कि सकारात्मक सोच, नियमित दिनचर्या और सही मार्गदर्शन ही इस कठिन दौर से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी तरीका है।
छात्रों को इस स्थिति को अवसर के रूप में देखना चाहिए। जो तैयारी अब तक की गई है, वह व्यर्थ नहीं जाएगी। अतिरिक्त समय को रिवीजन और आत्मविश्वास बढ़ाने में लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नीट जीवन का अंतिम अवसर नहीं, बल्कि कॅरियर की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
डॉ. हिना चावड़ा, मनोवैज्ञानिक सलाहकार, एनआईटी रायपुर
परीक्षा संबंधी तनाव के साथ आने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई छात्र एंग्जायटी, पैनिक अटैक, हताशा, नकारात्मक सोच और अवसाद जैसे लक्षणों से जूझ रहे हैं। - डॉ. सुरभि दुबे, एसोसिएट प्रोफेसर मनोरोग विभाग, नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर