MD-MS Admissions: चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बुधवार को एमडी-एमएस कोर्स की पहली आवंटन सूची जारी कर दी। इसमें 262 विद्यार्थियों के नाम हैं। आश्चर्यजनक रूप से इसमें एक भी एनआरआई कोटे की सीट नहीं है, जबकि प्रदेश के तीन निजी मेडिकल कॉलेजों में इस कोटे की 39 सीटें हैं। छात्रों को 29 जनवरी से 2 […]
MD-MS Admissions: चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बुधवार को एमडी-एमएस कोर्स की पहली आवंटन सूची जारी कर दी। इसमें 262 विद्यार्थियों के नाम हैं। आश्चर्यजनक रूप से इसमें एक भी एनआरआई कोटे की सीट नहीं है, जबकि प्रदेश के तीन निजी मेडिकल कॉलेजों में इस कोटे की 39 सीटें हैं। छात्रों को 29 जनवरी से 2 फरवरी तक एडमिशन लेना अनिवार्य होगा। इसमें जिसका विषय बदला है, उन्हें एक शपथपत्र देना होगा। पहले व दूसरे राउंड की कंबाइंड आवंटन सूची जारी होने से छात्रों को राहत मिली है।
दरअसल, प्रदेश में स्टेट ओपन कोटे के नाम पर विवाद के कारण काउंसलिंग में काफी देरी हो चुकी है। इस साल पीजी कोर्स में 28 फरवरी तक एडमिशन की आखिरी तारीख है। निर्धारित अवधि में चार चरणों की काउंसलिंग पूरी करनी होगी। अब दो चरणों की आवंटन सूची जारी होने से केवल दो चरण का सीट आवंटन बाकी रहेगा। 2 फरवरी के बाद तीसरे चरण की काउंसलिंग शुरू होगी और जीरो परसेंटाइल के लिए अलग से नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा।
दरअसल एनएमसी ने इस साल निजी कॉलेजों की खाली सीटों को देखते हुए जीरो परसेंटाइल से प्रवेश कराने की बात कही है। इसके तहत आरक्षित वर्ग के छात्र नीट पीजी में माइनस 40 नंबर रहने पर भी प्रवेश के लिए पात्र रहेंगे।
प्रदेश में एमडी-एमएस की कुल 646 सीटें हैं। निजी कॉलेजों में पीजी की सीटें बढ़ी हैं। सबसे ज्यादा सीटें नेहरू मेडिकल कॉलेज में 146 हैं। सिम्स बिलासपुर में 89, जगदलपुर में 28, राजनांदगांव में 18, अंबिकापुर में 46, रायगढ़ में 42, कोरबा में 13, रिम्स में 63, बालाजी में 100 व शंकराचार्य में 101 पीजी सीटें हैं। दूसरे राज्यों के 50 छात्रों ने पीजी कोर्स में प्रवेश के लिए रुचि नहीं दिखाई। ऐसे कुल 275 छात्र हैं, जिन्होंने पिछली बार काउंसलिंग में हिस्सा लिया था, लेकिन इस बार च्वाइस फिलिंग नहीं की।
मेरिट सूची में 657 छात्रों के नाम हैं। हाईकोर्ट के 16 जनवरी के फैसले के बाद राज्य शासन ने 22 जनवरी को संशोधित गजट नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके बाद काउंसलिंग कमेटी ने 23 जनवरी को एक स्पष्टीकरण भी जारी किया था, जिसमें ओपन कैटेगरी में इंस्टीट्यूशनल व नॉन इंस्टीट्यूशनल छात्रों को प्रवेश के लिए पात्र बताया गया है। नॉन इंस्टीट्यूशनल में छत्तीसगढ़ के मूल निवासी, जिन्होंने दूसरे राज्यों व एम्स में एमबीबीएस किया है, वे शामिल हैं।