
Tehsildar Strike in chhattisgarh: प्रदेशभर के नायब तहसीलदार और तहसीलदार के हड़ताल पर चले जाने से कामकाज बंद हो गया है। आय-जाति, नामांतरण और राजस्व जैसे कई काम रूक गए हैं। तहसील न्यायालयों में लंबित प्रकरण की संख्या बढ़ती जा रही है। अगले एक सप्ताह तक कामकाज ठप रहने की संभावना है। प्रदेशव्यापी हड़ताल का असर रायपुर में भी देखने को मिल रहा है। मंगलवार को तहसील कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। हालांकि, कुछ लोग तहसील में अपनी पेशी को लेकर पहुंचे थे। लेकिन उन्हें हड़ताल की जानकारी होने पर वापस लौटना पड़ा।
दरअसल हाल ही में सीतापुर में नायब तहसीलदार से अभद्रता व मारपीट हुई। जिसके बाद से कार्रवाई कराने को लेकर तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार हड़ताल पर हैं। मामले में कार्रवाई को लेकर सरकार से भी बात हुई, लेकिन किसी तरह का एक्शन नहीं होने से नाराज तहसीलदारों ने हड़ताल का रास्ता चुना। इस मामले में तहसीलदारों को कांग्रेस का समर्थन है। हड़ताल को जायज बताते हुए कांग्रेस ने बीजेपी विधायक को बचाने का आरोप सरकार पर लगाया है।
इसके कारण तहसील न्यायालयों में लंबित प्रकरणों पर सुनवाई के लिए मंगलवार को कई प्रकरण में पेशी की तारीख दी गई थी। जिसे एक हफ्ते के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। जानकारी के अनुसार 2 तारीख को होने वाले प्रकरणों पर सुनवाई अब सीधे 8 तारीख को होगी। वहीं 3, 4, एवं 5 तारीख को होने वाले प्रकरणों की सुनवाई भी अगले सप्ताह होगी।
हड़ताल का असर है कि इसके कारण लोगों के छोटो-मोटे काम भी नहीं हो पा रहे हैं। यहां आय-जाति, नामांतरण, मूल निवास, जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र, त्रुटि सुधार और राजस्व जैसे लंबित आवेदनों का निराकरण भी नहीं हो पाया। खसरा नंबर सुधार, सीमांकन के अलावा पुराने लंबित बटांकन, नामांतरण के काम भी अटक गए हैं।
बहुत से लोगों को हड़ताल की जानकारी नहीं थी, इसलिए कुछ लोग कार्यालय पहुंच गए, जिसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा।
कांग्रेस ने राजस्व अधिकारियों की हड़ताल को जायज बताया है। कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो को तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उन्होंने सत्ता बल के अहंकार में मर्यादा का उल्लंघन किया और नायब तहसीलदार के साथ मारपीट की। शुक्ला ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भाजपा दोषी विधायक को गिरफ्तार करवाने के बजाय उनका बचाव कर रही है।
घटना को एक सप्ताह बीत गया, लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कांग्रेस ने कहा कि यदि विधायक को अधिकारी की कार्यप्रणाली पर आपत्ति थी, तो वे उच्च अधिकारियों या मुख्यमंत्री से शिकायत कर सकते थे, मारपीट का अधिकार उन्हें किसने दिया। भाजपा प्रदेश में तालिबानी सरकार चलाना चाह रही है।