
CGPSC Recruitment Scam: ईडी ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग(सीजीपीएससी) घोटाले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए 31 जुलाई रिमांड पर लिया। उसे सीबीआई के विशेष न्यायाधीश की अदालत में शनिवार को पेश किया गया। इस दौरान ईडी ने अदालत में बताया कि इस घोेटाले में करीबी और रसूखदार लोगों से लेनदेन किया गया। इस योजनाबध्द खेल के पीछे सिंडीकेट काम कर रहा था।
विवेचना में मनीलॉड्रिन्ग करने के इनपुट मिले है। जिसके संबंध में पूछताछ किए जाने का जरूरत है कि भर्ती घोटाले की राशि को किस तरह से मैनेज करने के साथ किन किन लोगों तक पहुंचाया गया। घोटाले की रकम में से उन्हें कितनी रकम मिली। इसमें और कौन-कौन शामिल है। रिमांड आवेदन पेश करने पर सीसीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने 7 दिन के रिमांड आवेदन को मंजूरी दी। बता दें कि सीजीपीएससी भर्ती घोटाला में टामन सोनवानी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है। उसे ईडी के आवेदन पर जेल से कोर्ट लाया गया था।
सीजीपीएसपी भर्ती घोटाला 2020 से 2022 के बीच हुए था। आरोप है कि आयोग की परीक्षाओं और इंटरव्यू में पारदर्शिता की अनदेकी कर राजनीतिक और प्रशासनिक रसूख वाले परिवारों के उम्मीदवारों को उच्च पदों पर चयनित किया गया। इस दौरान योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य राजपत्रित पदों पर अपने नजदीकी लोगों को पद दिलवाने का आरोप है। प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। जांच एजेंसी ने छापेमारी में कई दस्तावेज और आपत्तिजनक साक्ष्य बरामद किए हैं। भर्ती घोटाले में सीबीआई द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार कुल 29 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई जांच के मुताबिक टामन ने परीक्षा के पर्चे अपने घर पर अपने रिश्तेदार साहिल, नीतेश, निशा कोसले और दीपा आडिल को दिए। वहीं उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर ने लीक हुआ पेपर बजरंग पावर एंड इस्पात कंपनी के डायरेक्टर श्रवण गोयल को सौंपा। उनके बेटे शशांक और बहू भूमिका ने इसी लीक पेपर से परीक्षा तैयारी की। जिसके बाद दोनों डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हुआ था।
उक्त परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का काम कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी को दिया गया था। जनवरी 2021 में कंपनी का कर्मचारी महेश दास 7 सेट प्रश्नपत्र लेकर रायपुर आए थे। उसके द्वारा सभी पर्चे आरती वासनिक को देने पर वह इसे अपने घर ले गई। जहां टामन और ललित के साथ मिलकर उनकी कॉपी करने के बाद पर्चों को दोबारा सील कर प्रिंटिंग के लिए वापस भेज दिया गया।
सीबीआई के बाद अब ईडी की एंट्री होने पर मनीलॉन्डि्रग के जरिए हुए कथित लेनदेन और इसमें जुड़े अन्य लोगों की भूमिका उजागर होगी। साथ ही ब्लैकमॅनी से खरीदे गए प्रापर्टी, निवेश और उपकृत होने वालों के नाम सामने आएगें। बताया जाता है कि इस घोटाले में गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलवाए जाने की तैयारी चल रही है।