
CG Manufacturing Cluster: प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने चार नए औद्योगिक पार्क (मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर) विकसित करने का निर्णय लिया है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आयोजित उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अंतर्गत औद्योगिक विकास योजना की राज्यस्तरीय समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई।
केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल: भारत औद्योगिक योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी औद्योगिक विकास नीति के तहत प्रभावी रूप से लागू किया है। राज्य में इस योजना के सुचारू संचालन और विभिन्न परियोजनाओं को समयबद्ध मंजूरी देने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है।
बैठक में राज्य के प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें डॉ. रोहित यादव सचिव, वित्त विभाग, अंकित आनंद सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग, रजत कुमार सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग, डॉ. सारांश मित्तर सचिव, ऊर्जा विभाग, इफ्फत आरा विशेष सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी शामिल थे।
समिति की दूसरी बैठक के दौरान प्रदेश के चार जिलों में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई और उन्हें स्वीकृति दी गई। राजनांदगांव जिले में स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, पटेवा, धमतरी जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, धूम्रपाली, जांजगीर-चांपा जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, सलखान और बस्तर जिले में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, नियानार में औद्योगिक पार्क स्थापित करने के प्रस्तावों पर स्वीकृति दी गई।
मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर ऐसा औद्योगिक क्षेत्र होता है, जहां एक ही स्थान पर विभिन्न प्रकार के उद्योगों के लिए सड़क, बिजली, पानी, लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउस, कॉमन फैसिलिटी सेंटर और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित की जाती हैं। इससे उद्योगों की लागत घटती है, उत्पादन क्षमता बढ़ती है और निवेशकों को कारोबार शुरू करने में आसानी होती है।
नए औद्योगिक पार्क बनने से प्रदेश में घरेलू और बाहरी निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही उत्पादन इकाइयों की स्थापना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। स्थानीय युवाओं को अपने जिले में ही रोजगार मिलने से पलायन भी कम हो सकता है।