
Mova Garment Factory: तीन साल पहले मोवा में 5 से 6 करोड़ की लागत से गारमेंट फैक्ट्री का निर्माण नगर निगम ने कराया था। उसे अब चालू कराने की उम्मीद बढ़ी है। क्योंकि महापौर मीनल चौबे ने महिलाओं के लिए रोजगार सृजन और उन्हें कढ़ाई, सिलाई, बुनाई का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का जोर दिया। उन्होंने निगम अफसरों की बैठक लेकर फैक्ट्री शुरू कराने के निर्देश दिए।
साथ ही तय किया गया है कि पीपीपी मॉडल पर 30 वर्ष की लीज पर देने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार किया गया है। इससे 500 से 1 हजार महिलाओं के लिए रोजगार सृजन होगा और स्थानीय वस्त्र उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। शहर के तीन जगहों पर कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल जैसी सुविधाएं अगले 8 से 10 महीने बाद मुहैया कराई जाएंगी। चयनित संस्था अपने व्यय से आधुनिक मशीनें लगाएगी। इससे बंद पड़ी गारमेंट फैक्ट्री का पुनः संचालन सुनिश्चित हो सकेगा। इस फैक्ट्री से विशेष रूप से महिलाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बनेंगे।
रायपुर नगर निगम की मोवा स्थित गारमेंट फैक्ट्री को दोबारा शुरू करने की पहल से शहर के रेडीमेड गारमेंट उद्योग को नई गति मिलने की उम्मीद है। अब तक शहर के कई छोटे कारोबारी और बुटीक संचालक बड़ी मात्रा में तैयार परिधान इंदौर, सूरत, दिल्ली और लुधियाना जैसे शहरों से मंगाते हैं। स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन नहीं होने के कारण लागत और सप्लाई दोनों प्रभावित होती हैं।
फैक्ट्री शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल यूनिफॉर्म, सरकारी विभागों की ड्रेस, अस्पतालों के लिनेन, औद्योगिक यूनिफॉर्म, महिला परिधान और रेडीमेड कपड़ों का उत्पादन किया जा सकेगा। इससे स्थानीय व्यापारियों को कम समय में सामान उपलब्ध होगा और परिवहन लागत भी घटेगी।
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ महिला रोजगार के रूप में सामने आ सकता है। नगर निगम का लक्ष्य 500 से 1,000 महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई और परिधान निर्माण से जोड़ना है। इससे महिलाओं की आय बढ़ेगी और उन्हें अपने शहर में ही रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। गारमेंट फैक्ट्री के संचालन से कपड़ा, धागा, बटन, जिप, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट जैसे सहायक कारोबारों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को नए अवसर मिलेंगे।