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छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए नई शुरुआत, मुफ्त मिलेट हेल्थ फूड कार्ट से मिलेगा रोजगार

Chhattisgarh Millet News: छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 72 नि:शुल्क मिलेट हेल्थ फूड कार्ट दिए जाएंगे।
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Millet Health Food Cart

मुफ्त मिलेट हेल्थ फूड कार्ट (photo source- Patrika)

Millet Health Food Cart: महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक मिलेट (श्रीअन्न) खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) की सेक्शन 8 कंपनी ’सीएसवीटीयू-फोर्टे’ ने आरईसी लिमिटेड (नई दिल्ली) के सहयोग से एक अनोखी पहल शुरू की है। इस योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए नि:शुल्क मिलेट हेल्थ फूड कार्ट उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रथम चरण में 72 मिलेट कार्ट वितरित करने का लक्ष्य है, जिन्हें स्थानीय प्रशासन की मदद से प्रमुख स्थानों पर स्थापित किया जाएगा।

इस पहल के अंतर्गत न केवल मिलेट कार्ट दिए जा रहे हैं, बल्कि सीएसवीटीयू परिसर (दुर्ग), ग्राम खम्हरिया और रावेलीडीह में स्थित प्राथमिक मिलेट प्रसंस्करण इकाइयों एवं ग्रामोद्योग केंद्रों के संचालन के लिए भी महिला समूहों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक पंजीकृत समूह विस्तृत जानकारी और आवेदन प्रक्रिया के लिए विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।

Self Help Groups Chhattisgarh: प्रशिक्षण और उद्यमिता पर जोर

कुलपति डॉ. अरुण अरोरा ने कहा कि यह पहल ’वोकल फॉर लोकल’, महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनेगी। चयनित महिला समूहों को केवल संसाधन ही नहीं दिए जाएंगे, बल्कि उन्हें सफल उद्यमी बनाने के लिए निम्नलिखित विषयों का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। निदेशक प्रो. आरएन पटेल के अनुसार, इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करना, स्थानीय कृषि उत्पादों को नया बाजार देना और समाज में पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूकता लाना है।

छत्तीसगढ़ में मिलेट और महिला स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा

छत्तीसगढ़ लंबे समय से मोटे अनाज (मिलेट/श्रीअन्न) की खेती करने वाले राज्यों में शामिल रहा है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से कोदो, कुटकी, रागी जैसे पारंपरिक अनाजों को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं। इन फसलों को पोषण से भरपूर होने के कारण "श्रीअन्न" के रूप में भी पहचान मिली है।

महिला स्व-सहायता समूहों (Self Help Groups) को स्वरोजगार से जोड़ना राज्य की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से इन समूहों को खाद्य प्रसंस्करण, कृषि आधारित उद्योग, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है, ताकि ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ सके और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

Millet Entrepreneurship: सार्वजनिक स्थानों पर किया जाएगा स्थापित

इसी दिशा में छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) की सेक्शन-8 कंपनी सीएसवीटीयू-फोर्टे ने आरईसी लिमिटेड के सहयोग से यह नई पहल शुरू की है। योजना के तहत महिला समूहों को नि:शुल्क मिलेट हेल्थ फूड कार्ट उपलब्ध कराए जाएंगे। पहले चरण में 72 कार्ट वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिन्हें प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित किया जाएगा।

इस परियोजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि महिलाओं को मिलेट आधारित खाद्य उत्पादों के प्रसंस्करण, विपणन, ब्रांडिंग और उद्यमिता का प्रशिक्षण देकर उन्हें सफल उद्यमी बनाना भी है। साथ ही, इससे स्थानीय किसानों की मिलेट फसलों को बेहतर बाजार मिलेगा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लोगों के बीच पौष्टिक भोजन के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

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