
Health News: गोबर नवापारा के सरकारी अस्पताल गरीबों की आखिरी उम्मीद होते हैं, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोबरा नवापारा में बुधवार शाम जो तस्वीर सामने आई, उसने स्वास्थ्य विभाग की पूरी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ड्यूटी के निर्धारित समय में अस्पताल से सभी डॉक्टर नदारद मिले। मरीज इलाज के इंतजार में परेशान बैठे रहे और पूरा अस्पताल नर्सों व वार्ड बॉय के भरोसे चलता दिखाई दिया।
सोशल मीडिया पर डॉक्टरों की अनुपस्थिति की शिकायत वायरल होने के बाद जब मीडिया टीम ने अस्पताल पहुंचकर हकीकत देखी, तो चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। अस्पताल में मरीज और स्टाफ तो उपस्थित थे, लेकिन जिनकी ड्यूटी थी, वे डॉक्टर गायब थे। सबसे बड़ा सवाल यह है कि 50 बिस्तर वाले इस अस्पताल में 9 डॉक्टर पदस्थ होने के बावजूद ओपीडी के समय एक भी डॉक्टर उपलब्ध क्यों नहीं था? प्रतिदिन करीब 150 मरीजों की ओपीडी वाले इस अस्पताल में यदि किसी गंभीर मरीज की हालत बिगड़ जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शाम की ओपीडी में डॉक्टरों का समय पर न मिलना अब आम बात हो चुका है। कई डॉक्टर निर्धारित समय से पहले ही चले जाते हैं। गरीब मरीज दूर-दराज से इलाज की उम्मीद लेकर सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों की यह अनुपस्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता को दर्शाती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार उच्च अधिकारी इस पर क्या संज्ञान लेते हैं।
इस लापरवाही पर बीएमओ अभनपुर ने फोन पर डॉक्टरों को तत्काल अस्पताल पहुंचने के निर्देश देने की बात कही। वहीं सीएमएचओ डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि अस्पताल में जल्द दो नए डॉक्टर भेजे जाएंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक डॉक्टर लंबे समय से अवकाश पर हैं।
9 डॉक्टर पदस्थ होने के बावजूद ड्यूटी के समय अस्पताल खाली क्यों था?
आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान से खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन है?
क्या सरकारी अस्पताल अब केवल नर्स और वार्ड बॉय के भरोसे संचालित होंगे?
लापरवाह डॉक्टरों के खिलाफ प्रशासन कब और क्या ठोस कार्रवाई करेगा?