
रायपुर. शिक्षाकर्मियों का स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन होने से उनके प्रधानपाठक और प्राचार्य बनाने का रास्ता खुल सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो संविलियन के बाद शिक्षाकर्मियों को कोषालय से नियमित वेतन भुगतान भी हो सकेगा। इससे शिक्षाकर्मियों आर्थिक परेशानियों से राहत मिलेगी।
शिक्षाकर्मियों के संविलियन पर हाइपावर कमेटी और विभागीय अधिकारियों ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है, लेकिन सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है, उसके मुताबिक शिक्षाकर्मियों को संविलियन के बाद कई मसलों में काफी राहत मिलेगी। अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण भी शिक्षाकर्मियों को फायदा होगा।
संविलियन के बाद तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भी अनुकंपा नियुक्ति मिल सकेगी। इसके अलावा उन्हें टीए व डीए का भी फायदा मिलेगा। एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण का भी रास्ता खुलेगा। संविलियन से सबसे ज्यादा फायदा शिक्षाकर्मी वर्ग तीन को मिलेगा। इनके अधिकांश शिक्षाकर्मी स्कूल शिक्षा विभाग में मर्ज हो जाएंगे।
मंत्री केदार को मिठाई खिलाई व पदोन्नति मांगी
संविलियन की घोषणा के बाद मोर्चा के प्रांतीय संयोजक वीरेन्द्र दुबे और केदार जैन के नेतृत्व में शिक्षाकर्मियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप से मुलाकात कर आभार जताते हुए मिठाई खिलाई और पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी नहीं होने की शिकायत भी की। उन्होंने मंत्री को अवगत कराया कि पदोन्नति की कार्रवाई नहीं होने से प्रदेशभर में 40 हजार पद रिक्त हैं। मंत्री ने आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया है। इस दौरान कार्तिक गायकवाड़, शिवराज सिंह ठाकुर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
18 जून को मंत्रिपरिषद की बैठक में मुहर!
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में 18 जून को मंत्रालय में शाम 5 बजे मंत्रिपरिषद की बैठक रखी गई है। इस बैठक में शिक्षाकर्मियों के संविलियन से जुड़े मुद्दे पर प्राथमिकता के साथ चर्चा कर उसे हरी झंडी दी जा सकती है। इसके अलावा विकास यात्रा और आगामी विधानसभा के मानसून सत्र की तैयारियों को लेकर भी बैठक में चर्चा होगी।
वेतन विसंगति सबसे बड़ी समस्या
संविलियन की घोषणा के बाद 2013 में हुई वेतन विसंगति को लेकर शिक्षाकर्मी सबसे ज्यादा चिंतित नजर आ रहे हैं। शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के प्रांतीय संयोजक संजय शर्मा और वीरेन्द्र दुबे ने संविलियन से पहले वेतन विसंगति को दूर करने की मांग की है। इसकी वजह से शिक्षाकर्मियों को हर माह 5 से 10 हजार रुपए तक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।