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रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना तो दूर सर्वे तक नहीं कर पाए नगर निगम के जिम्मेदार

रेन वाटर हार्वेस्ंटग सिस्टम लगवाना तो दूर निगम ने सर्वे तक नहीं कराया
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सागर

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Manish Kumar Dubey

•

Updated: 13 Jun 2018, 12:42 PM IST

रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना तो दूर सर्वे तक नहीं कर पाए नगर निगम के जिम्मेदार

रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना तो दूर सर्वे तक नहीं कर पाए नगर निगम के जिम्मेदार

सागर. शहर के नए-पुराने भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनवाना तो दूर नगर निगम के जिम्मेदार सर्वे तक नहीं करवा पाए हैं। योजना के तहत नक्शा पास करने वाले व्यक्ति का भवन बनने के बाद नगर निगम की टीम उस स्थल का निरीक्षण करती है कि संबंधित व्यक्ति ने सिस्टम लगवाया है या नहीं, लेकिन पिछले दस सालों में नगर निगम ने एेसा कोई सर्वे नहीं कराया है।
हैरानी की बात तो यह है कि नए भवनों के निर्माण में सिस्टम बनवाना अनिवार्य है, फिर भी निगमकर्मी इसमें लापरवाही कर रहे हैं। निगम प्रशासन लोगों द्वारा जमा की गई राशि से सिर्फ ब्याज कमाने में लगा है।
यह है गाइडलाइन
निगम प्रशासन के मुताबिक जो व्यक्ति अपना खुद का भवन बनवाना चाहता है, उसको भवन में रैन वॉटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम बनवाया अनिवार्य है। निगम की भवन-भूमि शाखा इसी शर्त पर संबंधित व्यक्ति का नक्शा पास करती है और उससे प्लॉट की साइज के आधार पर अमानत राशि जमा करवाती है। भवन में रैन वॉटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम बन जाने के बाद इसकी सूचना संबंधित व्यक्ति निगम प्रशासन को देता है और फिर निगम की टीम सर्वे के बाद उसकी धरोहर राशि लौटाता है। इसके विपरीत यदि संबंधित व्यक्ति भवन निर्माण के बाद भी रैन वॉटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनवाता है तो निगम प्रशासन उस व्यक्ति द्वारा जमा की गई अमानत राशि से यह सिस्टम बनवाएगा।
यह है गाइडलाइन
निगम प्रशासन के मुताबिक जो व्यक्ति अपना खुद का भवन बनवाना चाहता है, उसको भवन में रैन वॉटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम बनवाया अनिवार्य है। निगम की भवन-भूमि शाखा इसी शर्त पर संबंधित व्यक्ति का नक्शा पास करती है और उससे प्लॉट की साइज के आधार पर अमानत राशि जमा करवाती है। भवन में रैन वॉटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम बन जाने के बाद इसकी सूचना संबंधित व्यक्ति निगम प्रशासन को देता है और फिर निगम की टीम सर्वे के बाद उसकी धरोहर राशि लौटाता है। इसके विपरीत यदि संबंधित व्यक्ति भवन निर्माण के बाद भी रैन वॉटर हॉर्वेस्टिंग सिस्टम नहीं बनवाता है तो निगम प्रशासन उस व्यक्ति द्वारा जमा की गई अमानत राशि से यह सिस्टम बनवाएगा।

समझ आ गई भूजल स्तर की हकीकत
नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने बिना योजना के इस बार झील को खाली करवाया जिसके कारण शहर के भूजल स्तर की हकीकत सामने आ गई। भूगर्भशास्त्री डॉ. मनीष पुरोहित का कहना है कि लाखा बंजारा झील ग्राउंड वाटर रिचार्जिंग का काम करती है। शहर में यदि झील नहीं होती तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की उपयोगिता लोगों को अभी तक समझ आ चुकी होती। डॉ. पुरोहित का कहना है कि झील अकेले से काम बनने वाला नहीं है, आने वाले समय में भूजलस्तर को संतुलित स्थिति में रखना है तो इस दिशा में तेजी से कार्य करने होंगे।