
रायपुर@अनुराग सिंह। Government School Dilapidated Building: राजधानी में सरकारी स्कूलों के जर्जर भवन के कारण स्कूल का संचालन निजी भवन और निजी स्कूलों में किया जा रहा है। रायपुर में ही ऐसे 11 स्कूल हैं। गजब की बात यह है कि विधायकों के लेटर के बाद भी कई स्कूलों को अब तक डिस्मेंटल भी नहीं कराया जा सका है। बात करें गुरुघासीदास नगर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला की तो लगभग दो साल से एक निजी स्कूल के भवन स्कूल संचालित हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि विधायक द्वारा लेटर दिए जाने के बाद भी दो साल के सरकारी जर्जर स्कूल को अब तक डिस्मेंटल नहीं किया गया है।
जानकारी यह भी है कि इस स्कूल के लिए शिक्षक के द्वारा 30 हजार रुपए भी दिए जा रहे हैं। लेकिन अधिकारियों से जब इस पर बात की गई तो उनको इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। जानकारों का यह भी कहना है कि स्कूल के लिए भवन निर्माण का फंड स्वीकृत हो गया है इसके बावजूद निर्माण और पुराने भवन को हटाने की कार्रवाई नहीं की गई है।
शासकीय प्राथमिक शाला गुरुघासीदास नगर के जर्जर भवन को लेकर विधायक राजेश मूणत ने करीब दो साल पहले रायपुर कलेक्टर को पत्र लिखा था। इसमें भवन को 24 घंटे के भीतर डिस्मेंटल कराने और विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की गई थी। पत्र के कुछ दिन बाद ही स्कूल के सामने स्थित निजी स्कूल ने विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए अपने भवन में जगह देने पर सहमति दे दी थी। इसके बाद कक्षाएं वहां लगने लगीं। तब से स्कूल का संचालन वैकल्पिक भवन में ही हो रहा है, लेकिन मूल स्कूल भवन को डिस्मेंटल करने की कार्रवाई अब तक नहीं की जा सकी है।
रायपुर जिले में 134 स्कूलों के 394 से ज्यादा भवन जर्जर बताए जा रहे हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। इन स्कूलों में कई स्कूल ऐसे है जहां 8 से 10 कक्षाओं को डिस्मेंटल किया जाना है। इनमें से कुछ ही स्कूल को छोड़कर बाकि स्कूलों को अभी भी विद्यार्थियों की कक्षाएं लग रही हैं। राज्य में आए दिन जर्जर भवन के गिरने और विद्यार्थियों के घायल होने की घटनाएं हो रही हैं। उसके बाद भी राजधानी में ही स्कूलों की स्थिति को सुधारा नहीं जा रहा है।
स्कूल के संचालन के लिए सालाना 30 हजार रुपए किराया दिए जाने की जानकारी है, लेकिन संबंधित विभाग को इसकी जानकारी नहीं होने की बात सामने आई है। इससे स्कूल के वैकल्पिक संचालन और भुगतान की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। विभागीय पत्राचार में भी किराए को लेकर कोई बात भी नहीं की गई है। लेकिन जानकारों की माने तो पिछले दो सालों से स्कूल अनुदान राशि का उपयोग की किराए के रूप में किया जा रहा है।
जानकारों के अनुसार, जर्जर भवन को डिस्मेंटल कराने के लिए कई स्कूलों का निरीक्षण कार्य भी पूराकर लिया गया है। स्कूल में डिस्मेंटल कराने के लिए अलग-अलग नगर निगम जोन ऑफिस को काम आवंटित है लेकिन अधिकारियों की उदासीनता और रुचि न लेने के कारण स्कूलों के काम पेंडिंग में चल रहे हैं। जोन कमिश्नरों को इसकी जानकारी भी है। उसके बाद भी डिस्मेंटल करने और नए भवन बनाने की दिशा में कोई कार्य नहीं किया जा रहा है।
एमजी सतीश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर के मुताबिक, शासन की ओर से अभी जर्जर स्कूलों की जानकारी मांगी गई है। रायपुर में कोई भी स्कूल किराए के भवन में नहीं चल रहा है। स्कूल वैकल्पिक भवन में संचालित हो रहे हैं।