
रायपुर. राज्य सरकार तेलंगाना में बसे आदिवासियों की बस्तर वापसी का रास्ता बनाने की तैयारी में है। प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य और आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने शुक्रवार को बताया कि वे तेलंगाना में जाकर उन परिवारों से मिल चुके हैं।
उन लोगोंं ने अपने गांव लौटने की इच्छा जताई है। लखमा ने कहा, विपक्ष में रहते हुए वे सरकार से उनकी वापसी की मांग करते रहे हैं। अब वे लोग उनका स्वागत करने के लिए तैयार हैं। गांव छोडकऱ गए लोगों की जमीने सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, सरकार बस्तर के आदिवासी का दिल जीतने की कोशिश कर रही है। कवासी लखमा ने कहा, जो लोग तेलंगाना में बसे हैं, उनको वहां की सरकार अनुसूचित जनजाति की सुविधा नहीं देती। वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलकर मांग करेंगे कि मंत्रियों की एक समिति को तेलंगाना के मुख्यमंत्री के पास भेजा जाए।
सरकार की ओर से बस्तर के आदिवासियों को तेलंगाना में सरकारी सुविधाएं दिलाने की मांग की जाए। माओवादियों के खिलाफ चले सलवा जुड़ुम आंदोलन के दौरान बस्तर के 600 गांव खाली करा लिए गए थे। वहां के लाखों लोग पलायन कर तत्कालीन आंध्रप्रदेश की सीमा के जंगलों में चले गए। तबसे वे वहां से अपनी माटी में लौटने की बाट जोह रहे हैं।
जंगल की कीमत पर उद्योग नहीं : उद्योग मंत्री ने कहा, कांग्रेस उद्योग और विकास का विरोध नहीं करती। लेकिन जंगल की कीमत पर उद्योग नहीं लगेंगे। उन्होंने कहा, आदिवासी के लिए उद्योग बड़ा नहीं है। उसे उसका जंगल और जमीन चाहिए। यह उनके लिए मां-बाप से बढकऱ हैं। उन्होंने कहा, उनकी सरकार बस्तर में छोटे-छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाने की कोशिश में है।
आदिवासी किसी का वोटबैंक नहीं
कांग्रेस पर आदिवासियों के वोटबैंक की राजनीति करने भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए लखमा ने कहा, आदिवासी किसी का वोटबैंक नहीं है। उन्होंने कहा, वोट की राजनीति भाजपा करती है। हालांकि उन्होंने कहा, लोकसभा चुनाव में आदिवासियों की जंगलों से बेदखली का आदेश कांग्रेस का मुददा रहेगा।