रायपुर

पत्रिका एक्सक्लूसिव: छत्तीसगढ़ में ग्रीन पटाखों का बढ़ा क्रेज, QR कोड से ऐसे करें असली-नकली की पहचान, 100 करोड़ का कारोबार

Green Crackers: इस दिवाली बाजार में ग्रीन पटाखों की मांग बढ़ी है। कारोबारियों का दावा है कि प्रदेश में बिकने वाले करीब 95 फीसदी पटाखे ग्रीन श्रेणी के हैं। इनकी पहचान पैकेट पर लगे CSIR-NEERI के लोगो और QR कोड को स्कैन करके की जा सकती है।
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Updated: 4 Nov 2026, 2:21 PM IST
Chhattisgarh News
ग्रीन पटाखों का बढ़ा क्रेज (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर @अजय रघुवंशी। Diwali Crackers Business: इस दीवाली ग्रीन पटाखों की वैरायटी का दबदबा है। आप जो पटाखे खरीद रहे हैं वह ग्रीन पटाखें है या सामान्य। इसकी जांच के लिए ग्रीन पटाखों का लोगो और क्यूआर कोड को स्कैन किया जा सकता है। कारोबारियों के मुताबिक बाजार में बिकने वाले करीब 95 फीसदी पटाखे ग्रीन श्रेणी के आ रहे हैं। पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30 से 50 फीसदी तक कम प्रदूषण फैलाने के दावे के बीच ग्राहकों में इनकी मांग बढ़ी है।

प्रदेश में सिर्फ दिवाली के दौरान पटाखों का कारोबार करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। रायपुर सहित दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा और राजनांदगांव जैसे प्रमुख शहरों में भी ग्रीन पटाखों की बिक्री का जोर है। प्रदेशभर में 5000 से अधिक छोटी-बड़ी पटाखा दुकानें संचालित है। दिवाली के आसपास इन दुकानों पर सबसे ज्यादा कारोबार होता है। इस बार बाजार में अनार, फुलझड़ी, चकरी, रॉकेट और अलग-अलग तरह के आतिशबाजी उत्पादों की ग्रीन वैरायटी उपलब्ध है।

ग्रीन पटाखे क्या हैं?

ग्रीन पटाखे सामान्य पटाखों का ऐसा विकल्प हैं, जिनमें रासायनिक तत्वों और कच्चे माल की मात्रा में बदलाव करके प्रदूषण कम करने की तकनीक अपनाई जाती है। इन्हें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) ने विकसित किया है। इन पटाखों में पारंपरिक पटाखों की तुलना में पार्टिकुलेट मैटर यानी हवा में घुलने वाले धूल के बारीक कणों का उत्सर्जन कम करने पर जोर दिया जाता है।

ग्रीन पटाखों के पैकेट पर क्या लिखा होता है

  • सीएसआईआर एनईईआरआई का ग्रीन लोगो यह प्रमाणित करता है कि उत्पाद ग्रीन पटाखों की श्रेणी से जुड़ा है।
  • ग्रीन फायर वक्र्स का निशान लोगो होता है।
  • क्यू कोड- विशिष्ट कोड दिया जाता है, जिससे उसकी प्रामाणिकता जांची जा सकती है।
  • निर्माता का नाम, पटाखा बनाने वाली कंपनी और उसकी पंजीयन संबंधी जानकारी।
  • बैच और उत्पाद की जानकारी, उत्पाद का नाम, प्रकार, बैच नंबर और निर्माण संबंधी विवरण।
  • प्रमाणन संबंधी जानकारी : एनईईआरआई रजिस्ट्रेशन और पीईएसओ लाइसेंस की जानकारी।
  • उत्पाद और बैच नंबर : पटाखे का प्रकार, नाम और संबंधित बैच की पहचान।
  • केमिकल फॉर्मूलेशन और टेस्ट सर्टिफिकेट : उत्पाद में इस्तेमाल की गई निर्धारित फॉर्मूलेशन और परीक्षण संबंधी जानकारी।

सन्नी संतवानी, पटाखा कारोबारी, लाखेनगर बाजार, रायपुर के मुताबिक, अब बाजार में 95 फीसदी कंपनियां ग्रीन पटाखे का लोगो और स्कैनर लगा रही है, जिसमें लाइसेंस और कंपनियों की अन्य जानकारियां होती है। ग्रीन पटाखों से प्रदूषण कम होता है। प्रदेश में दीवाली में पटाखों का व्यवसाय 100 करोड़ पार होने की संभावना है।

Updated on:
4 Nov 2026, 2:21 PM IST
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