
कोमल धनेसर@रायपुर. हरे और खाकी रंग की वर्दी के साथ कंधे पर बंदूक लटकाए जब जंगलों में जाते हैं तो वे जाबांज जवान होते हैं और वही जवान जब युवाओं के बीच पहुंचते हैं तो वे गुरु बन जाते हैं। ऐसे गुरु जिसने मिले ज्ञान के बाद उनकी जिंदगी ही बदल जाएगी।
आईटीबीपी के जवान माओवादी क्षेत्र में युवाओं को ऐसी शिक्षा दे रहे हैं जो उन्हें देशसेवा से जोड़ेगी। एक ओर राजनांदगांव के 38 बटालियन में युवाओं को सुरक्षा बलो में भर्ती के लिए तैयार किया जा रहा है तो कोंडागांव के 41 बटालियन में खेल के जरिए बेटियों को जवानों ने खेल से जोड़कर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
दोनों ही जगह इन गुरुओं ने गुरुदक्षिणा के रूप में केवल एक वादा लिया कि सभी कभी गलत राह पर नही जाएंगे। देशसेवा का जज्बा लिए वे हमेशा अपनी मंजिल की ओर आगे कदम बढ़ाएंगे।
राजनांदगांव के नक्सल क्षेत्र छुरिया स्थित 38 बटालियन हेडक्वाटर्र में पिछले कुछ महीने से 41 युवा ऐसे प्रशिक्षण से गुजर रहे हैं जिसे पूरा करने के बाद वे सुरक्षा बलों की प्रवेश परीक्षा उर्तीण करने सक्षम हो जाएंगे। डीआईजी अशोक कुमार नेगी और कमांडेंट नरेन्द्र सिंह के प्रयास से यहां इन युवाओं को सुरक्षा बल में भर्ती की तैयारी के लिए तैयार किया गया।
अधिकारियों की मानें तो इन्हें मनाकर लाना आसान नहीं था,पर जब उन्होंने इतने सालों में आईटीबीपी का कार्य देखा तो वे खुद ही ट्रेनिंग के लिए तैयार हो गए। यहां उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ फिजिकल ट्रेनिंग भी दी जा रही है। हर क्लास के अपने अलग गुरु।
फिजिलक एक्सपर्ट की निगरानी में शारीरिक दक्षता की तैयारी और मेडिकल ऑफिसर उन्हें रिर्टन एग्जाम के साथ ही मेडिकल टेस्ट की भी तैयारी करा रहे हैं। द्वितीय कमान अधिकारी प्रदीप नेगी ने बताया कि यह वे लोग है जो अपना काम करने के बाद बचे हुए समय में इन युवाओं को देशसेवा का जज्बा जगाते हैं।
उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों में जल्द ही भर्तियां निकलने वाली है और इनकी तैयारी ऐसी है कि इनमें से 80 फीसदी सलेक्ट हो जाएंगे। इससे पहले सीजी पुलिस की भर्ती के वक्त भी ट्रेनिंग कैंप लगाए गए थे जिसमें 329 को ट्रेनिंग दी गई थी। वे कहते हैं कि टीचर्स की गुरुदक्षिणा भी यही होगी, माओवादियों का साथ देने की बजाए देश सेवा में आगे आएं।
गुरु बनकर बेटियों को बढ़ाया आगे
कों डागांव में तैनात आईटीबीपी 41 बटालियन के कमाडेंट सुरिंदर खत्री ही गुरु बनकर बेटियों को आगे बढ़ा रहे हैं। जब समय मिलता है वे स्कूल में टीचर बन जाते हैं और जब ग्राउंड में आते हैं तो एक कोच की तरह वे खिलाडिय़ों को गढऩे में लग जाते हैं। कुछ महीने पहले उन्होंने अपने कुछ सीओबी के आसपास के गांवों की बेटियों को बॉस्केटबॉल के लिए चुना। खेल के बेसिक सिखाए और राजनांदगांव में हुए एक स्पेशल कैंप में 20 बेटियों को ट्रेनिंग के लिए भेजा।
कुछ दिन पहले ही अच्छी खबर आई कि उस कैंप में 10 का सलेक्शन हो गया है जो अब राजनांदगांव के नामी स्कूलों के हॉस्टल में रहकर ना सिर्फ पढ़ाई करेंगी बल्कि खेल की बारीकियों को भी सीखेंगी। जिससे वे अपने प्रदेश और देश के लिए खेलने तैयार हो सकें।
खत्री बताते हैं कि कुछ दिन पहले इन बेटियों को विदाई दी गई। उस वक्त वे जाने से पहले उनके पैर छूने लगी। तब उन्होंने उनसे एक वादा लिया कि वे जिस लक्ष्य को लेकर घर से निकली हैं उसे पूरा कर लौटेंगी और अपने गांव के युवाओं को गलत राह पर जाने से रोकेंगी।
बटालियन हेडक्वार्टर सहित सीओबी में युवाओं के लिए ट्रेङ्क्षनग प्रोग्रम चलाया जा रहा है। हमारे जवानों और अधिकारियों ने उनकी सोच को बदल दिया है। उम्मीद है छुरिया में चल रही ट्रेनिंग के बेहतर नतीजे सामने आएंगे।
अशोक कुमार नेगी, डीआईजी आईटीबीपी, सेक्टर हेडक्वार्टर राजनांदगांव