रायपुर

‘कोई महिला टोनही नहीं होती’… डॉ. दिनेश मिश्र का बड़ा संदेश, हरेली पर चलेगा जागरूकता अभियान

Hareli 2026: हरेली पर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति भूत-प्रेत, जादू-टोना और टोनही जैसी अंधविश्वासी मान्यताओं के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाएगी।
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Aug 12, 2026
Hareli 2026
Hareli 2026: भूत-प्रेत और जादू-टोने से जोड़ना सिर्फ भ्रम(photo-patrika)

Hareli 2026: छत्तीसगढ़ के पारंपरिक हरेली पर्व पर अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति विशेष जनजागरण अभियान चलाएगी। अभियान का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में भूत-प्रेत, जादू-टोना और टोनही जैसी अंधविश्वासी मान्यताओं को लेकर फैले भय और भ्रम को दूर करना है। समिति के सदस्य हरेली अमावस्या की रात गांवों और निर्जन स्थानों का भ्रमण कर लोगों को वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। इस दौरान टोनही प्रताड़ना के खिलाफ शपथ दिलाई जाएगी, जागरूकता पंपलेट बांटे जाएंगे और ग्राम पंचायतों व सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर लगाकर लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने का संदेश दिया जाएगा।

Hareli 2026 Special: हरेली की रात होगा विशेष जनजागरण अभियान

समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया कि हरेली की रात ग्रामीणों से सीधे संवाद किया जाएगा। इस दौरान टोनही प्रथा और अंधविश्वास के खिलाफ लोगों को शपथ दिलाई जाएगी। साथ ही पंपलेट और जागरूकता सामग्री वितरित की जाएगी तथा ग्राम पंचायतों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता पोस्टर भी लगाए जाएंगे।

भूत-प्रेत और जादू-टोने से जोड़ना सिर्फ भ्रम

डॉ. मिश्र ने कहा कि हरेली पर्व को जादू-टोना या अलौकिक शक्तियों से जोड़ना पूरी तरह भ्रम है। कुछ क्षेत्रों में यह धारणा प्रचलित है कि हरेली की रात विशेष साधना करने से जादुई शक्तियां प्राप्त होती हैं, लेकिन ऐसी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे तथ्यों और विज्ञान पर आधारित सोच को अपनाएं।

टोनही प्रथा सामाजिक अन्याय का कारण

समिति के अनुसार, किसी भी महिला को टोनही कहना या घोषित करना पूरी तरह गलत और अमानवीय है। पहले बीमारियों और प्राकृतिक घटनाओं के वैज्ञानिक कारणों की जानकारी सीमित होने के कारण लोग इन्हें जादू-टोने या बुरी नजर से जोड़ देते थे। कई मामलों में महिलाओं को बिना किसी आधार के दोषी ठहराकर सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा, जिसे समाप्त करना जरूरी है।

बरसात में स्वास्थ्य को लेकर भी दी सलाह

डॉ. मिश्र ने कहा कि सावन के मौसम में बारिश, नमी और उमस के कारण संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। दूषित पानी और भोजन, मक्खियों तथा मच्छरों के कारण दस्त, आंत्र संक्रमण, पीलिया, वायरल बुखार और मलेरिया जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सांप या जहरीले कीड़े के काटने पर झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल जाकर उपचार कराएं।

नीम की टहनियां तोड़ने की बजाय पौधे लगाने की अपील

समिति ने हरेली पर्व पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। डॉ. मिश्र ने लोगों से नीम की टहनियां तोड़ने के बजाय नीम और अन्य उपयोगी पौधे लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना और अंधविश्वास से दूर रखना समाज के बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक है।

Updated on:
12 Aug 2026 08:08 am
Published on:
12 Aug 2026 08:07 am