
Heavy Rain Warning: प्रदेशभर में मानसूनी बारिश ने एक बार फिर विकराल और व्यापक रूप ले लिया है। द्रोणिका और ऊपरी हवा के चक्रवाती तंत्र (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) के सक्रिय होने से बीते तीन दिनों से प्रदेशभर में लगातार बारिश हो रही है। उत्तर छत्तीसगढ़, बिलासपुर, दुर्ग और रायपुर संभाग के ज्यादातर इलाकों में भारी बारिश दर्ज की गई है। बारिश के कारण नदियां, नाले और बांध उफान पर हैं, जबकि निचली बस्तियों और कई मुख्य मार्गों पर पानी भरने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले 5 दिनों तक मानसून के सक्रिय रहने की संभावना है, जिससे कई जिलों में भारी से अतिभारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने हिदायत दी है कि बारिश और बिजली चमकने के दौरान खुले में या पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें। उफनते नदी-नालों, रपटों और निचले रास्तों को पार करने का जोखिम न उठाएं।
रायगढ़ जिले में पिछले 24 घंटे में 13 सेमी बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश से केलो नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया, जिसके कारण एहतियात के तौर पर केलो बांध के 5 गेट खोलकर 170 से 180 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। केलो परियोजना के ईई मनीष गुप्ता ने बताया कि जलभराव बढ़ने पर और गेट खोले जा सकते हैं। हसदेव और महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
सक्ती मार्ग पर जमड़ी नाला उफान पर आने से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई है। जैजैपुर क्षेत्र में भी अधिकांश नदी-नाले सड़कों के ऊपर से बह रहे हैं। पिछले 6 दिनों से लगातार हो रही बारिश से गरियाबंद, रायपुर और धमतरी को जोड़ने वाला त्रिवेणी संगम जलमग्न हो गया है। प्राचीन कुलेश्वरनाथ महादेव मंदिर चारों ओर से पानी से घिर गया है। हालांकि, श्रद्धालु लक्ष्मण झूले से होकर मंदिर दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
लगातार हो रही बारिश से कबीरधाम जिले की मैकल पर्वतमाला का प्राकृतिक सौंदर्य चरम पर है। सरोदा जलाशय से भोरमदेव मंदिर जाने वाला मार्ग बादलों, धुंध और हरियाली से सराबोर नजर आ रहा है। पहाड़ियों पर उतरते बादलों के इस विहंगम दृश्य को देखने और कैमरों में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में लोग और श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। सरगुजा जिले के सीतापुर (केसला) में मांड नदी में अवैध रेत उत्खनन में लगा एक ट्रैक्टर अचानक जलस्तर बढ़ने से बह गया। ट्रैक्टर चालक ने कूदकर किसी तरह अपनी जान बचाई।
प्रदेश में अब तक औसतन 348.5 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य (444.6 मिमी) से करीब 22 फीसदी कम है। हालांकि, प्रदेश के 33 में से 18 जिलों में सामान्य या उससे अधिक पानी बरस चुका है। 4 जुलाई तक जो जिले सूखे की स्थिति में थे, वहां मानसून ने भरपाई कर दी है। बिलासपुर में अब तक सामान्य से 14% अधिक (452.3 मिमी) तथा रायपुर में सामान्य से 4% अधिक (401.2 मिमी) पानी गिर चुका है। प्रदेश में सबसे ज्यादा 573.8 मिमी बारिश सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में दर्ज की गई है, जो सामान्य से 61% अधिक है।
24 घंटे की बारिश (सेमी में)
13 सेमी: रायगढ़
12 सेमी: पेंड्रारोड
10 सेमी: पुसौर, तमनार
9 सेमी: बरपाली
7 सेमी: सारंगढ़, रामचंद्रपुर, अकलतरा, बम्हनीडीह, डभरा, बलौदा
6 सेमी: खरसिया, मस्तूरी, वाड्रफनगर, नवागढ़, छिंदगढ़
5 सेमी: जांजगीर, नारायणपुर, शिवरीनारायण, रामानुजगंज, मरवाही, देवभोग
लगातार हो रही बारिश से कबीरधाम जिले की मैकल पर्वतमाला का प्राकृतिक सौंदर्य चरम पर है। सरोदा जलाशय से भोरमदेव मंदिर जाने वाला मार्ग बादलों, धुंध और हरियाली से सराबोर नजर आ रहा है। पहाड़ियों पर उतरते बादलों के इस विहंगम दृश्य को देखने और कैमरे में कैद करने के लिए बड़ी संख्या में लोग भोरमदेव पहुंच रहे हैं। सरगुजा जिले के सीतापुर (केसला) में मांड नदी में अवैध रेत उत्खनन में लगा एक ट्रैक्टर अचानक जलस्तर बढ़ने से बह गया। ट्रैक्टर चालक ने कूदकर किसी तरह अपनी जान बचाई।