
रायपुर@अनुराग सिंह। Chhattisgarh News: सितंबर का महीना शुरू होने वाला है और देशभर में इसे हिंदी माह के रूप में मनाया जाता है। लेकिन राजधानी के पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रविवि) में हिंदी पढ़ाने के लिए प्रोफेसर भी नहीं मिल पा रहे हैं। स्थिति यह है कि प्रोफेसर के एक पद के लिए महज दो आवेदन और एसोसिएट प्रोफेसर के दो पदों के लिए केवल पांच आवेदन आए हैं। लेकिन सभी उम्मीदवार अपात्र हो गए। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर के चार पदों के लिए 189 आवेदन आए हैं।
रविवि के हिंदी विभाग में लंबे समय से वरिष्ठ स्तर के शिक्षकों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विश्वविद्यालय ने प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की, लेकिन आवेदन की संख्या ने विश्वविद्यालय प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी है। प्रोफेसर जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए केवल दो और पांच उम्मीदवारों का आवेदन मिले हैं। एसोसिएट प्रोफेसर के पद की स्थिति भी बहुत बेहतर नहीं है। यहां सिर्फ पांच आवेदन आए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के सामने अब इन पदों के लिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन करना चुनौती बन गया है।
हर वर्ष सितंबर में हिंदी माह के दौरान विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा के उपयोग, प्रचार-प्रसार और साहित्य से जुड़े कई कार्यक्रम होते हैं। विद्यार्थियों के लिए निबंध, वाद-विवाद, भाषण, कविता पाठ सहित विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं। हिंदी के महत्व पर व्याख्यान और संगोष्ठियां भी होती हैं। ऐसे समय में विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में ही वरिष्ठ शिक्षकों की कमी का मामला सामने आना शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करता है।
खासकर विश्वविद्यालय स्तर पर हिंदी जैसे विषय में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर का पद केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होता। ये शिक्षक शोध, पीएचडी गाइडेंस, पाठ्यक्रम निर्माण और अकादमिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एक तरफ प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के लिए गिने चुने आवेदन मिले हैं। वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर के चार पदों के लिए 189 उम्मीदवारों ने आवेदन किए हैं। इनमें से 169 उम्मीदवार पात्र मिले हैं। प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पात्र या अपात्र सूची में यदि किसी उम्मीदवार को कोई आपत्ति हो तो 7 सितंबर तक आपत्ति कर सकते हैं।