
रायपुर . आयकर बार एसोसिएशन रायपुर एवं रायपुर सीए ब्रांच के द्वारा राइस मिल व्यवसाय में जीएसटी के प्रावधान एवं आयकर अधिनियम के अंतर्गत नए आयकर रिटन्र्स फॉर्म में हुए परिवर्तन के प्रावधानों पर लेक्चर मीटिंग का आयोजन किया गया।
आयकर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सीए विजय मालू ने कहा कि इस बार सीबीङीटी ने कर निर्धारण वर्ष 2018-19 आयकर रिटन्र्स फॉर्म में बहुत सारे बदलाव किए है। अभी तक छोटे व्यापारियों को अपने विक्रय या कुल प्राप्ति का 6 या 8 प्रतिशत आय दिखाने पर खाता बही मेन्टेन नहीं करना पड़ता। उसे सिर्फ अपने लेनदारी, देनदारी, स्टॉक एवं कैश की जानकारी देनी होती है।
परंतु अब छोटे व्यपारियों को भी लगभग बैलेंस शीट की सारी चीजों की जानकारियां जैसे कैपिटल, सुरक्षित एवं असुरक्षित लोन, अग्रिम, स्थाई सम्पति, लेनदारी, देनदारी, बैंक, केस आदि की जानकारी देनी पड़ेगी। उसे जीएसटी के अंतर्गत बताये विक्रय एवं अन्य जानकारियां भी देनी होगी।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में सीए संजय बिल्थरे ने कहा कि हजारों राइस मिलें वर्तमान में राज्य में संचालित हैं। चावल सबसे ज्यादा उपभोग किये जाने वाला अनाज है इसीलिए जीएसटी के पूर्व के करों के प्रावधान में इसे करमुक्त रखा गया था और यही अवधारणा अनुमानित थी कि जीएसटी में भी इसे करमुक्त रखा जाएगा, लेकिन पूर्णत: ऐसा नहीं हुआ और धान को करमुक्त रखा गया है। चावल यदि बिना ब्रांड का है तो करमुक्त और ब्रांड वाले चावल पर 5 की दर से टैक्स है।
आयोजन के द्वितीय सत्र में सीए डिम्पल वल्र्यानी ने बताया कि आइटीआर-1 में जो वेतन भोगियों एवं एक मकान सम्पति से प्राप्त आय की दशा में भरा जाता है वह अब वेतन के अंतर्गत प्राप्त समस्त प्रकार के करयोग्य भत्तो और अनुलाभ को दर्शाना होगा इसी तरह मकान संपत्ति में प्राप्त छूट की पूर्ण जानकारी दर्शायी जाएगी।
आइटीआर -2 में पहले किसी पार्टनरशिप फॉर्म के पार्टनर द्वारा भर दिया जाता था लेकिन अब उनके लिए आइटीआर-3 भरा जायेगा। कार्यक्रम का संचालन सचिव सीए योगेश पुरोहित ने किया। मुख्य रूप से सीए बी. सुब्रमण्यम, सीए ललित जैन, एडवोकेट प्रवीण शर्मा, सीए किशोर बरडिया प्रमुख रूप से उपस्थित थे