
सूरत
जानकर आश्चर्य होगा कि विकास की दौड़ में अग्रणी और सिल्कसिटी व डायमंड सिटी के नाम से मशहूर सूरत शहर में सिर्फ 70 हजार वेतनभोगी रिटर्न फाइल करते हैं। इसमें भी टैक्सेबल आय वाले तो इसका 10 प्रतिशत ही हैं। इसका मतलब यह है कि कंपनी संचालक टीडीएस काटे बिना ही नकद में पेमेन्ट कर रहे हैं। विभाग ऐेसे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
मिली जानकारी के अनुसार आयकर अधिकारियों का कहना है कि सूरत कमिश्नरेट में वेतनधारकों में तीन साल में सिर्फ दो हजार करदाता बढ़े हैं
दक्षिण गुजरात में रिटर्न फाइल करने वाले वेतनभोगी की संख्या साढे तीन लाख है, जिसमें सूरत में सिर्फ 70 हजार हैं। सूरत के वेतनभोगी करदाताओं से आयकर विभाग को ५0 करोड़ रुपए तक की आय होती है। वेतनभोगी करदाताओं में छह हजार करदाता ऐसे हैं, जिनकी आय 10 लाख से अधिक है। दो करदाता ऐसे हंै जिनकी आय पचास लाख रुपए से अधिक और एक करदाता की आय 80 लाख रुपए से अधिक है। पिछले वित्तीय वर्ष में सूरत कमिश्नरेट में लगभग ढाई लाख करदाता बढ़े हैं, जबकि वेतनधारकों में तीन साल में सिर्फ दो हजार करदाता बढ़े हैं। सूरत कमिश्नरेट में रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या लगभग 17.81 लाख है,
जिसमें कि वेतनधारकों की संख्या 70 हजार के करीब है।
आयकर अधिकारियों का कहना है कि सूरत के कपड़ा उद्योग में 10 लाख, हीरा उद्योग में पांच लाख, कपड़ा बाजार में लगभग 10 लाख और अन्य स्थानों पर कम से कम पांच लाख लोग काम करते हैं। फिर भी रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या इतनी कम है। इसका मतलब यह है कि कंपनी संचालक टीडीएस काटे बिना ही नकद में पेमेन्ट कर रहे हैं। विभाग ऐेसे संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करेगा। सूरत के मुख्य आयकर आयुक्त अजयदास मेहरोत्रा ने पिछले दिनों विविध औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर सेमिनार भी किया था और कंपनी संचालकों को उनके यहां काम करने वालों से रिटर्न फाइल कराने का आग्रह किया था।
Published on:
22 Apr 2018 01:00 am
बड़ी खबरें
View Allसूरत
गुजरात
ट्रेंडिंग
