
Raipur news:रायपुर स्थित राज्य के सबसे बड़े सेंट्रल जेल में बंद कैदियों ने इस बार गणेशोत्सव के लिए एक अनोखी और प्रेरणादायक पहल की है। हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों ने अपनी कला और भक्ति के संगम से 500 से ज्यादा इको-फ्रेंडली भगवान गणेश की मूर्तियां तैयार की हैं। ये मूर्तियां जेल परिसर के अंदर बने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स 'उत्थान' और बाहर लगाए गए विशेष स्टॉल पर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। आम नागरिक सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक यहां से मूर्तियों की खरीदारी कर सकते हैं। बिक्री से मिलने वाली राशि से लागत निकालने के बाद बची हुई राशि कैदियों को उनके प्रोत्साहन और पारिश्रमिक के रूप में दी जाएगी।
इन मूर्तियों की सबसे बड़ी खासियत इनकी पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल बनावट है। जेल के बगीचे से निकाली गई 2 क्विंटल से अधिक काली चिकनी मिट्टी, गोशाला का गोबर और धान की भूसी मिलाकर मूर्तियां तैयार की गई हैं। मध्य प्रदेश के सतना और जबलपुर जेल से प्रेरणा लेकर हर मूर्ति के अंदर 10 से 15 तुलसी के बीज डाले गए हैं। विसर्जन के बाद ये बीज पौधों के रूप में अंकुरित होंगे। मूर्तियों की सजावट में केमिकल या पीओपी का उपयोग नहीं किया गया है। इनमें हल्दी, गेरू, नील और वाटर कलर जैसे इको-फ्रेंडली रंगों का इस्तेमाल हुआ है।
पिछले तीन वर्षों से जेल में बनी मूर्तियों की भारी मांग रही है। बीते वर्ष मात्र 150 मूर्तियां बनाई गई थीं, जो केवल चार दिनों में बिक गईं। कई श्रद्धालु खाली हाथ लौट गए थे। इसी भारी मांग को ध्यान में रखते हुए इस साल कैदियों ने बीते तीन-चार महीनों की कड़ी मेहनत से 500 से अधिक मूर्तियां तैयार की हैं।
जेल अधिकारियों के अनुसार बाजार की मूर्तियों में व्यापार होता है, लेकिन जेल की मूर्तियों में कैदियों का पश्चाताप और ईश्वर से मुक्ति की प्रार्थना छिपी होती है। जेल अधीक्षक योगेश क्षत्री ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य कैदियों को हुनरमंद बनाना है, ताकि रिहाई के बाद यह कला उनके सम्मानजनक रोजगार का जरिया बन सके। इसके अलावा, कैदियों ने जेल के अंदर स्थापना के लिए 4 फीट की विशेष मूर्ति भी बनाई है, जहां 10 दिनों तक भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन होगा।
1 फीट की मूर्ति: 301 रुपए
डेढ़ फीट की मूर्ति: 501 रुपए
2 फीट की मूर्ति: 1500 रुपए