
Open Jail Chhattisgarh: 2 अक्टूबर से छत्तीसगढ़ में खुलेंगी 7 ओपन जेल(photo-patrika)
Open Jail Chhattisgarh @मनोज साहू: छत्तीसगढ़ में सजा काट रहे कैदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार नई पहल करने जा रही है। गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर से प्रदेश में 7 नई खुली जेलें (ओपन जेल) शुरू करने की तैयारी है। इस व्यवस्था में अच्छे आचरण वाले पात्र कैदियों को जेल परिसर से बाहर जाकर काम करने और शाम को वापस लौटने का अवसर मिलेगा।
बस्तर संभाग में जगदलपुर केंद्रीय जेल के 50 बंदियों को इस योजना का लाभ देने की तैयारी है। इनमें 25 पुरुष और 25 महिला कैदी शामिल होंगे। इसके अलावा प्रदेश के अन्य केंद्रीय और जिला जेलों में भी क्षमता के अनुसार ओपन जेल की व्यवस्था शुरू की जाएगी।
ओपन जेल का मुख्य उद्देश्य कैदियों को केवल सजा देना नहीं, बल्कि उन्हें समाज में दोबारा सामान्य जीवन जीने के लिए तैयार करना है। योजना के तहत पात्र बंदियों को दिन के समय परिसर से बाहर जाकर अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार काम करने का अवसर मिलेगा।
बंदी कृषि, निर्माण कार्य, सिलाई, हस्तशिल्प और स्वरोजगार जैसी गतिविधियों से जुड़ सकेंगे। दिनभर काम करने के बाद उन्हें निर्धारित समय पर वापस ओपन जेल परिसर में लौटना होगा। इससे कैदियों में जिम्मेदारी, आत्मनिर्भरता और सामाजिक व्यवहार विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
ओपन जेल की सुविधा सभी बंदियों के लिए उपलब्ध नहीं होगी। शासन ने पात्रता के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं। इसके तहत ऐसे बंदी पात्र होंगे जिन्हें आजीवन कारावास या कम से कम 10 वर्ष की सजा हुई हो।
इसके साथ ही कैदी की उम्र 30 से 60 वर्ष के बीच होना जरूरी है। उसे कम से कम 7 वर्ष की सजा भुगतनी होगी और इस अवधि में उसका आचरण अच्छा होना चाहिए। किसी गंभीर अनुशासनहीनता या जेल नियमों के उल्लंघन वाले बंदियों को योजना से बाहर रखा जाएगा।
ओपन जेल का लाभ देने से पहले बंदियों की पृष्ठभूमि और अपराध की प्रकृति की भी जांच की जाएगी। शासन ने करीब 11 श्रेणियों के कैदियों को योजना के लिए अपात्र रखा है। आईपीसी की 44 और बीएनएस की 46 धाराओं के तहत दोषी बंदियों के अलावा राज्य या सेना के खिलाफ अपराध करने वाले तथा मृत्युदंड को आजीवन कारावास में बदले जाने वाले मामलों से जुड़े बंदियों को भी योजना से बाहर रखा गया है।
राज्य में प्रस्तावित ओपन जेलों की क्षमता अलग-अलग रखी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अंबिकापुर में 200 पुरुष कैदियों, जबकि जगदलपुर में 25 पुरुष और 25 महिला बंदियों को रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है। अन्य जेलों में भी उनकी उपलब्ध क्षमता के अनुसार पुरुष और महिला बंदियों को शामिल किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य मौजूदा जेल परिसरों और उपलब्ध अधोसंरचना का इस्तेमाल करते हुए पुनर्वास की सुविधा विकसित करना है।
जेल विभाग के अनुसार ओपन जेल के लिए उपलब्ध अधोसंरचना का ही उपयोग किया जाएगा। इससे सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय भार कम रखने के साथ कैदियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने के अवसर मिलेंगे। महानिदेशक जेल हिमांशु गुप्ता के अनुसार यह एक अलग तरह की पहल है, जिसमें उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर बंदियों के पुनर्वास पर ध्यान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कैदियों को व्यावहारिक सुविधा, प्रशिक्षण और समाज में दोबारा स्थापित होने के अवसर उपलब्ध कराना है।
ओपन जेल मॉडल में कैदियों को नियंत्रित वातावरण में जिम्मेदारी के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें जेल से रिहाई के बाद रोजगार हासिल करने, आत्मनिर्भर बनने और समाज में सामान्य जीवन जीने के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।
Updated on:
23 Aug 2026 12:39 pm
Published on:
23 Aug 2026 12:38 pm
