Medical PG Counselling: मेडिकल PG के दूसरे राउंड की काउंसलिंग में जारी मेरिट सूची में दूसरे राज्यों के 56 छात्रों के नाम थे, लेकिन च्वाइस फिलिंग नहीं करने के कारण केवल 2 छात्रों को ही MD-MS सीट आवंटित हुई।
Medical PG Counselling: प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में पीजी कोर्स में दूसरे राउंड की काउंसिलिंग के लिए आई मेरिट सूची में 56 छात्रों के नाम थे, लेकिन सीट आवंटन केवल दो छात्रों को किया गया। इसका मतलब साफ है कि छात्रों ने मेरिट में रहते हुए भी च्वाइस फिलिंग नहीं की इसलिए उन्हें एमडी-एमएस की सीट नहीं मिली।
ये स्थानीय छात्रों के लिए राहत की बात है। दरअसल, पहले राउंड में 14 छात्रों को सीटें दी गईं थीं, लेकिन केवल दो छात्रों ने एडमिशन लिया है। बाकी 12 सीटें ब्लॉक हो गईं, जिसे भरने के लिए दूसरे राउंड में शामिल की गई हैं। स्टेट ओपन कोटा का मामला हाईकोर्ट में है इसलिए दूसरे राज्यों के छात्र सीटें आवंटित होने के बाद भी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन लेने से बच रहे हैं।
दूसरे राउंड से स्पष्ट हुआ कि मेरिट में आने के बावजूद दूसरे राज्यों के छात्रों ने स्टेट ओपन कोटा में कोई खास रुचि नहीं दिखाई है। दोनों छात्रों को निजी मेडिकल कॉलेज में सीटें मिली हैं। दूसरे राउंड में प्रवेश की आखिरी तारीख 13 जनवरी है। पहले राउंड के बाद पीजी की 326 सीटें खाली हैं। इनमें स्टेट ओपन कोटे के लिए 147 व स्टेट इंस्टीट्यूशनल कोटे के लिए 131 सीटें खाली हैं।
Medical PG Counselling: वहीं, एनआरआई की 38 सीटें खाली हैं, जिनमें 20 ओपन व 18 इंस्टीट्यूशनल कोटे की हैं। पहले राउंड में 25 फीसदी से कम सीटों पर एडमिशन हुआ। सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की 593 सीटें हैं। इनमें केवल 125 छात्रों ने प्रवेश लिया था।
सरकारी के लिए 163 व निजी कॉलेजों के लिए 110 सीटों का आवंटन किया गया था। इस साल पीजी में एडमिशन की आखिरी तारीख 31 जनवरी है। पत्रिका यह मामला प्रमुखता से उठा रहा है कि देश के किसी भी राज्य में स्टेट कोटे की सीटों के लिए ओपन कैटेगरी नहीं है।