रायपुर

Chhattisgarh News: तिमाही परीक्षा या मजाक! चंदे के पैसे से प्रिंट हुआ प्रश्न पत्र, ब्लैक बोर्ड में लिखे गए सवाल

Chhattisgarh Education News: प्रदेश में आयोजित तिमाही परीक्षा में ​शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। दरअसल चंदे के पैसे से प्रश्न पत्र प्रिंट कर बच्चों को दिया गया तो कहीं ब्लैकबोर्ड में सवाल लिखा गया..
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Sep 22, 2026
Chhattisgarh education news
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फोटो- AI)

Chhattisgarh News: अनुराग सिंह की रिपोर्ट. छत्तीसगढ़ के स्कूलों में तिमाही की परीक्षा सोमवार से शुरू हो गई है। परीक्षा शुरू होते ही सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसमें खामियां और अव्यवस्था साफ दिखाई दी। कई स्कूलों में शिक्षकों ने खुद पैसा इकट्ठा कर प्रश्न पत्र प्रिंट करवाया तो कई जगह प्रश्न पत्र के सवाल ब्लैकबोर्ड में दिखकर परीक्षा ली गई। प्रश्न पत्र 10वीं और 12वीं को छोड़कर सभी कक्षाओं के लिए पीडीएफ दिए गए थे। इसके कारण शिक्षकों को ही प्रिंट आउट निकलवाना पड़ा।

विभाग की लापरवाही यहां तक रही कि सोमवार से परीक्षा शुरू होनी थी और शनिवार को प्रश्न पत्र का ईमेल भेजा गया। यह ई मेल ओपन ही नहीं हुआ जिसके कारण रविवार को पीडीएफ मिला। इसके कारण भी शिक्षकों को प्रिंटआउट निकलवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

Chhattisgarh Education News: स्कूलों में नहीं पहुंच पाई पूरी किताबें

तिमाही परीक्षा तो शुरू हो गई है लेकिन राजधानी के ही कई स्कूलों में पूरी किताबें नहीं पहुंच पाई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जब जिम्मेेदार से इसपर चर्चा हुई तो उनका कहना था कि सभी स्कूलों में किताबें पहुंच गई है। लेकिन अभी स्कूलों से मांग पत्र मंगवाए जा रहे है। वहीं जब उनसे यह पूछा गया कि किताबें अभी भी भेजी जा रही है तो उनका कहना था कि वे किताबें एससीईआरटी की है। कार्यालय से डाटा तो नहीं मिला लेकिन मांग पत्र से साफ है कि काफी सारे स्कूल किताबें कम होने से मांग पत्र भेज रहे हैं। एक शिक्षक ने बताया कि किताबें स्कूल में कम आई है जिसके कारण कई बच्चों को पूरी किताबें नहीं मिल पाई है। अब ऐसे में ही उन्हें परीक्षा देना पड़ रहा है।

परीक्षा की गोपनीयता ताक पर

शिक्षा विभाग की ओर स्कूलों को प्रश्न पत्र पीडीएफ में भेजे गए। जिन्हें स्कूल प्रमुखों में अपने पहचान या जैसी उन्हें सहूलियत मिली वहां से प्रिंट करवाया। ऐसे में परीक्षा को लेकर बरती जाने वाली गोपनीयता केवल विभाग के दफ्तरों तक ही सीमित रही। उसके बाद पूरा पेपर मार्केट में ही कॉपी होते रहा। एक स्कूल के प्राचार्य ने बताया कि 10वीं और 12वीं के प्रश्न पत्र ही भेजे गए हैं। बाकि कक्षाओं के प्रश्न पत्र की पीडीएफ शेयर की गई थी। शिक्षा अधिकारी की ओर से पीडीएफ भी शनिवार को भेजा गया। जिसके कारण काफी परेशानी हुई। रविवार को सब बंद रहती है। जिसके कारण अलग-अलग स्त्रोत से संपर्क कर प्रिंटआउट निकलवाया गया।

आधे घंटे देर सेे शुरु हुई परीक्षा

एक शिक्षक ने नाम न बताने के आग्रह पर बताया कि बीईओ और बीआरसी की ओर से शनिवार को प्रश्न पत्र ईमेल किया गया था। लेकिन ईमेल भी करप्ट हाे गया था, जिसके बाद अधिकारियों की ओर से पीडीएफ भेजा गया। पीडीएफ भी रविवार की रात को मिला। सोमवार की सुबह प्रिंट करने के कारण देरी हुई और परीक्षा जो 10 बजे शुरू होनी थी वो लगभग आधे से एक घंटे देरी से शुरु हुई।

विभाग से प्रिंट आउट के पैसे नहीं

परीक्षा के पहले स्कूलों में आलम ऐसा रहा कि प्रश्न पत्र तो मिल गए है अब इसे प्रिंट कैसे करवाया जाए। कारण था कि न तो विभाग सेे पैसे दिए गए और न ही संस्था प्रमुख से प्रिंट करवाने के लिए कोई पैसे मिले। ऐसे में शिक्षकों के पास केवल मिलकर चंदा कराने और प्रश्न पत्र का प्रिंटआउट निकलवाने का विकल्प बाकी था। शिक्षकों ने आपस में 500-500 रुपए मिलाए और प्रश्न पत्र प्रिंट करवाया। जानकारों के अनुसार, ऐसी स्थिति सबसे ज्यादा उन स्कूलों में देखने को मिली जिन्हें युक्तियुक्तकरण के कारण मर्ज किया गया है।

Updated on:
22 Sept 2026 12:25 pm
Published on:
22 Sept 2026 12:25 pm