जहां शादी में तो पति को सुपरवाईज़र बताया गया, लेकिन युवक तो कोई काम ही नहीं करता था। शादी के बाद
रायपुर/कोरबा. हमारे यहां शादियों में अक्सर कई झूठ बोले जाते है। कभी कभी तो लोग इसे सामान्य मान कर भूल जाते है। लेकिन कुछ झूठ लोगों को जिंदगी भर की तकलीफ दे देते है। ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा में सामने आया है। जहां शादी में तो पति को सुपरवाईज़र बताया गया, लेकिन युवक तो कोई काम ही नहीं करता था। शादी के बाद पहले तो पत्नी को मायके ही छोड़ दिया। और जब उसे वापस लेकर आया तो पति और परिवार वालों ने उस पर ऐसे ऐसे जुल्म ढाए कि...
दरअसल, 22 जनवरी 2017 को बिलासपुर की रहने वाली श्वेता पटेल ने बालकोनगर के सेक्टर टू में रहने वाले संतोष गुप्ता के साथ अर्तजातिय विवाह की थी। टाटा स्टील में सुपरवाइजर बताकर एक बिचौलिए ने युवती की शादी बेरोजगार युवक से करा दी। दोनों की शादी में करीब साढ़े चार लाख रुपए नगद खर्च हुए थे। शादी के बाद तो पहले संतोष और उसके परिवार वालों ने श्वेता को मायके में ही छोड़ दिया।
श्वेता से उसने कहा कि तुम यही रहो। मै अभी तुम्हें नहीं ले जा सकता। शादी के तीन महीने बीत गए, लेकिन संतोष पत्नी को लेने बिलासपुर नहीं पहुंचा। इस बात से लड़की क घरवाले काफी परेशान हो गए। जिसके बाद उन्होंने लड़के को बार बार फ़ोन करके श्वेता को ले जाने के लिए बुलाने लगे। कई बार बुलावे पर संतोष श्वेता को लेने बिलासपुर पहुंचा।
श्वेता को घर ले जाने के बजाए वह उसे ओडिसा के जाजपुर ले गया। वहां उसे एक कमरे के मकान में रखा। जाजपुर में श्वेता को पता चला कि उसका पति बेरोजगार है। जिसके बाद वह पति को कुछ काम धाम करने के लिए बोलने लगी। जिसके बाद पति और परिवार वालों ने उसे शारीरिक और मानसिक यातनाएं देने शुरू करदी। साथ ही उस पर दहेज़ के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया।
पुलिस ने बताया कि बिलासपुर में रहने वाली श्वेता पटेल की शिकायत पर उसके पति संतोष गुप्ता 38, देवर विनय गुप्ता 32, देवरानी शिप्रा गुप्ता 28, सास शिखा गुप्ता 58, बिलौलिए सालू मंडल 28 और सालू के पति राजीव मंडल 32 के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोपियों पर श्वेता को मानसिक व शारीरिक तौर पर प्रताडि़त करने व झूठ बोलकर शादी करने का आरोप है। पुलिस छानबीन कर रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।