रायपुर

Green Crackers: छत्तीसगढ़ में ग्रीन पटाखों की धूम, क्यूआर कोड से जांचें और खरीदें

करीब 95 फीसदी पटाखे ग्रीन कैटेगरी के आ रहे, कारोबारियों के मुताबिक ग्रीन क्रैकर्स 30 से 50 फीसदी तक कम प्रदूषण फैलाते हैं...
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Updated: 4 Nov 2026, 2:36 AM IST
Green Crackers

Green Crackers: इस दीपावली ग्रीन पटाखों की वैरायटी का दबदबा है। आप जो पटाखे खरीद रहे हैं वह ग्रीन पटाखें हैं या सामान्य, इसकी जांच के लिए ग्रीन पटाखों का लोगो और क्यूआर कोड को स्कैन किया जा सकता है। कारोबारियों के मुताबिक बाजार में बिकने वाले करीब 95 फीसदी पटाखे ग्रीन श्रेणी के आ रहे हैं।

पारंपरिक पटाखों की तुलना में 30 से 50 फीसदी तक कम प्रदूषण फैलाने के दावे के बीच ग्राहकों में ग्रीन पटाखों की मांग बढ़ी है। छत्तीसगढ़ में सिर्फ दिवाली के दौरान पटाखों का कारोबार करीब 100 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। रायपुर सहित दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा और राजनांदगांव जैसे प्रमुख शहरों में भी ग्रीन पटाखों की बिक्री का जोर है।

प्रदेशभर में 5000 से अधिक छोटी-बड़ी पटाखा दुकानें संचालित है। दिवाली के आसपास इन दुकानों पर सबसे ज्यादा कारोबार होता है। इस बार बाजार में अनार, फुलझड़ी, चकरी, रॉकेट और अलग-अलग तरह के आतिशबाजी उत्पादों की ग्रीन वैरायटी उपलब्ध है।

ग्रीन पटाखों के पैकेट पर क्या लिखा होता है

1. ग्रीन लोगो: यह प्रमाणित करता है कि उत्पाद ग्रीन पटाखों की श्रेणी से जुड़ा है। ग्रीन फायर वर्क्स का निशान लोगो होता है।

2. क्यूआर कोड: विशिष्ट कोड दिया जाता है, जिससे उसकी प्रामाणिकता जांची जा सकती है। निर्माता का नाम, पटाखा बनाने वाली कंपनी और उसकी पंजीयन संबंधी जानकारी।

ग्रीन क्रैकर्स क्या है?

ग्रीन क्रैकर्स सामान्य पटाखों का ऐसा विकल्प हैं, जिनमें रासायनिक तत्वों और कच्चे माल की मात्रा में बदलाव करके प्रदूषण कम करने की तकनीक अपनाई जाती है। इन्हें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की नागपुर स्थित राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) ने विकसित किया है। ग्रीन पटाखों में पारंपरिक पटाखों की तुलना में पार्टिकुलेट मैटर यानी हवा में घुलने वाले धूल के बारीक कणों का उत्सर्जन कम करने पर जोर दिया जाता है।

प्रदूषण कम होता है...

अब बाजार में 95 फीसदी कंपनियां ग्रीन पटाखे का लोगो और स्कैनर लगा रही हैं, जिसमें लाइसेंस और कंपनी की अन्य जानकारियां होती हैं। ग्रीन पटाखों से प्रदूषण कम होता है। प्रदेश में दिवाली में पटाखों का व्यवसाय 100 करोड़ रुपए से पार होने की संभावना है। -सन्नी संतवानी, पटाखा कारोबारी, लाखेनगर बाजार, रायपुर