रायपुर

दस्तावेज तक नहीं पूछे, बाहरी राज्यों के छात्रों को छत्तीसगढ़ कोटे में दे दी MBBS की सीटें, रायपुर में मचा बवाल

Chhattisgarh MBBS counseling: बाहरी राज्यों के छात्रों को छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस की सीटों पर एडमिशन देने का मामला सामने आया है। कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन कार्यालय में शिकायत के बाद अफसरों ने जांच की बात कही है..
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Sep 22, 2026
MBBS Admission 2026
प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फोटो- AI)

MBBS Admission: पीलूराम साहू की रिपोर्ट. प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में दूसरे राज्यों के छात्रों को स्टेट कोटे से एमबीबीएस की सीटें देने का आरोप लगा है। 10 छात्रों ने कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन कार्यालय में मामले की शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि दस्तावेज सत्यापन में गंभीरता नहीं बरतने के कारण दूसरे राज्यों के छात्रों को छत्तीसगढ़ में सीट दी गई है। इनके कारण प्रदेश के छात्रों का बड़ा नुकसान हुआ है। शिकायत के बाद कमिश्नर ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

Chhattisgarh MBBS Counseling: इन शहरों में हुआ एडमिशन

शिकायत के अनुसार ओडिशा व महाराष्ट्र की छात्राओं का एडमिशन जांजगीर-चांपा, झारखंड की छात्रा का एडमिशन अंबिकापुर में हुआ है। वहीं दो निजी कॉलेजों में तीन व एक अन्य छात्रा का प्रवेश एक निजी डेंटल कॉलेज में हुआ है। कमिश्नर से सभी छात्रों का एडमिशन रद्द करने की मांग की गई है। ताकि उनके प्रवेश रद्द होने पर स्थानीय निवासी को मौका मिल सके।

गौरतलब है कि जिन छात्रों ने डीएमई कार्यालय में शिकायत की है, उन्होंने हाईकोर्ट में भी याचिका लगाई थी। यहां स्टेट कोटे के लिए अलग से सूची जारी नहीं करने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पुख्ता दस्तावेज है तो फिर से याचिका दायर की जा सकती है। दरअसल प्रदेश में स्टेट कोटे के लिए अलग से सूची जारी नहीं की जाती। हालांकि कुछ छात्र फर्जी डोमिसाइल बनवाकर प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश ले लेते हैं।

सक्षम अधिकारी ने जारी

दस्तावेज सत्यापन के दौरान मेडिकल कॉलेजों में स्क्रूटिनी अधिकारी केवल ये देखते हैं कि सर्टिफिकेट वेलिड अधिकारियों ने जारी किया है या नहीं। वे यह नहीं देखते की छात्र छत्तीसगढ़ का मूल निवासी है कि नहीं। मौके पर ये पता भी नहीं किया जा सकता। मामले की जब शिकायत होती है, तभी जांच कराई जाती है। इसी साल सिम्स में फर्जी ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट बनाने पर 3 छात्रों का एडमिशन रद्द किया गया था। 10 साल पहले भी रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में एक छात्र का प्रवेश रद्द किया जा चुका है।

मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर रितेश अग्रवाल ने कहा कि दूसरे राज्यों की छात्राओं को सरकारी व निजी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन देने की शिकायत मिली है। मामले को जांच के लिए दिया गया है। सभी एडमिशन दस्तावेज सत्यापन के बाद दिया जा रहा है। सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर को देखकर मान लिया जाता है कि सर्टिफिकेट वैलिड है।

Updated on:
22 Sept 2026 01:01 pm
Published on:
22 Sept 2026 11:19 am