
MP Brijmohan Agrawal: छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाई जा रही सुशासन तिहार में लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाए जाने के मामले बढ़ रहे हैं। इसे लेकर एक ओर नया विवाद भी खड़ा हो गया है। दूसरी तरफ इसके वीडियो भी सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहे हैं। खासकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल चर्चाओं में बने हुए हैं। अपने संसदीय क्षेत्र में आयोजित समाधान शिविर में एक बार फिर अधिकारी की अनुपस्थिति पर सांसद भड़के उठे और सार्वजनिक रूप से सस्पेंड करने के आदेश दिए।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल उस वक्त भड़क उठे जब पता चला कि आयोजित शिविर में रेंजर मौजूद नहीं है। इसका वीडियो भी सामने आया है। जिसमें सांसद ( Brijmohan Agrawal ) पुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय के बाउंड्री वॉल बनाने की बात कह रहे हैं। वीडियो में सांसद बृजमोहन कहते हैं, जो ये पुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय है, ये महाविद्यालय का बाउंड्री वॉल बनना है। इसमें क्या दिक्कत है? क्यों फॉरेस्ट वाले आपत्ति लगाते हैं बताओ? कौन है वो? फॉरेस्ट की जमीन है तो बाउंड्री नहीं बन सकता।
आगे कहा कि कॉलेज बन गया है, फिर क्यों नहीं बन रहा है? और नहीं तो फॉरेस्ट से बार्ब्ड वायर लगा के कैंपा वॉल से, किसी भी वॉल से वृक्षारोपण कर के उसमें बाउंड्री बना दो। क्या दिक्कत है? पक्का बाउंड्री वॉल नहीं बनेगा? झाड़ लगा के वृक्षारोपण करके अंदर जाली लगा दो और बाहर बार्ब्ड वायर लगा दो। कौन है? रेंजर कौन है? रेंजर कौन है? कहाँ है भंवरिया? क्यों भंवरिया नहीं आया है? रेंजर क्यों नहीं आया है? रेंजर होना चाहिए ना यहाँ पर, क्यों नहीं आया है? शो कॉज नोटिस जारी करो या सस्पेंड करो उसको। सस्पेंड करो। क्यों नहीं आया यहाँ पर? जा, सस्पेंड कर दिया उसको।
गोबरा-नवापारा स्थित हरिहर हाई स्कूल मैदान में सुशासन तिहार शिविर का आयोजन हुआ। जिसमें सांसद बृजमोहन अग्रवाल शिक्षण संस्थानों में मूलभूत सुविधाओं की कमी पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया और स्पष्ट कहा कि बच्चों की शिक्षा से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिविर के दौरान सांसद ने नवापारा नगर के लिए विकास कार्यों की कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कर क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात दी। कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही।
सार्वजनिक मंचों से अधिकारियों और कर्मचारियों को फटकार लगाए जाने के मामलों ने नया विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे को लेकर अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने नाराजगी जाहिर करते हुए सरकार और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी दी है। फेडरेशन का कहना है कि जनता के बीच किसी कर्मचारी को अपमानित करना उचित नहीं है और यह प्रशासनिक व्यवस्था के मनोबल को प्रभावित करता है। वहीं सरकार की ओर से मंत्रियों ने कहा है कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की समस्याओं को उठाना और जवाबदेही तय करना है। इस मुद्दे पर अब कर्मचारी संगठनों और जनप्रतिनिधियों के बीच बहस तेज हो गई है।