
Chhattisgarh News: विधायक एवं महिला कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष संगीता सिन्हा ने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार महिलाओं की अस्मिता और सुहाग के सबसे पवित्र प्रतीक मंगलसूत्र का अपमान कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में नवविवाहित बेटियों को नकली और गिलट का मंगलसूत्र देना महाभ्रष्टाचार और संवेदनहीनता का शर्मनाक प्रमाण है। उन्होंने इस घोटाले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में हुए सामूहिक कन्या विवाह में घोटाला सामने आया है। मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह में शामिल 184 नवविवाहित जोड़ों को मंगलसूत्र चांदी का बताकर सरकारी खर्च पर दिया गया था, वह पूरी तरह नकली और गिलट सस्ती मिलावटी धातु का निकला। विभाग की फाइलों से पैसे असली चांदी के मंगलसूत्र के नाम पर स्वीकृत कराकर ठिकाने लगा दिए गए। विवाह जैसे पवित्र संस्कार में भ्रष्टाचार कर जनता की आस्था और भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है। पूरा महाघोटाला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के अपने गृह संभाग सरगुजा में हुआ है।
नवविवाहिता संजना दयाल ने बताया कि उनकी शादी 10 फरवरी को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत हुई थी। शादी के दौरान उन्हें जो मंगलसूत्र दिया गया था, वह नकली निकला। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने मंगलसूत्र पहनना शुरू किया तो उसका रंग काला पड़ने लगा। इसके बाद उन्होंने इसकी जांच कराई, जिसमें पता चला कि यह असली चांदी का नहीं है। संजना का कहना है कि योजना के तहत मिले इस मंगलसूत्र की क्वालिटी को लेकर उन्हें निराशा हुई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के पत्र क्रमांक एफ-3-41/2012/मबावि/50 दिनांक 14 जनवरी 2013 के बिंदु 2.1 के अनुसार मंगलसूत्र में चांदी का होना अनिवार्य नहीं है। इसी कारण उपलब्ध वित्तीय सीमा एवं बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए योजना के अंतर्गत कृत्रिम (आर्टिफिशियल) मंगलसूत्र क्रय कर हितग्राहियों को प्रदान किया गया था। बाद में प्रदायित मंगलसूत्रों की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित फर्म के भुगतान से प्रति मंगलसूत्र 1,000 रुपये की कटौती की गई तथा यह राशि सीधे संबंधित वधुओं के बैंक खातों में हस्तांतरित कर दी गई।
परिणामस्वरूप प्रत्येक पात्र कन्या को कुल 36,000 रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्राप्त हुई, जबकि शेष राशि विवाह आयोजन एवं आवश्यक सामग्री पर नियमानुसार व्यय की गई। अतः यह स्पष्ट किया जाता है कि 10 फरवरी 2026 को आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में किसी प्रकार की वित्तीय अथवा प्रशासनिक अनियमितता नहीं की गई। संपूर्ण आयोजन शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों, वित्तीय प्रावधानों एवं भंडार क्रय नियमों का पालन करते हुए संपन्न कराया गया। जनसामान्य से अपील है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित भ्रामक एवं अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें तथा किसी भी सूचना की सत्यता संबंधित विभाग अथवा जिला प्रशासन से प्राप्त करें।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को जो साडिय़ां बांटी गईं, वे इतनी घटिया और 5 मीटर से भी कम लंबाई की थीं। पैसे कमाने और कागजी आंकड़े चमकाने की भूख में योजना में पहले से शादीशुदा जोड़ों की दोबारा शादी करा दी जाती है। इसके पूर्व रायपुर में हुए सामूहिक विवाह में बिना किसी टेंडर के चहेतों को काम देकर पंडाल और व्यवस्थाओं में करोड़ों का वारा-न्यारा किया गया था।
इसी प्रकार आंगनबाड़ी केंद्रों में 40 करोड़ रुपए से अधिक की पोषण सामग्री खरीदी में गड़बड़ी, 2,899 केंद्रों में नियमों को ताक पर रखकर टुकड़ों में 16 करोड़ की टीवी और आरओ यूनिट खरीदी का घोटाला एवं शुचिता योजना के तहत सेनेटरी पैड वितरण में भारी भ्रष्टाचार किया गया।