रायपुर

कोरबा चावल घोटाले में बड़ा खुलासा! चहेते अफसरों को बचाने के लिए बदली गई जांच रिपोर्ट, 4 जिला प्रबंधकों के नाम गायब

Korba Rice Scam: RTI से मिले दस्तावेजों के अनुसार, चहेते अधिकारियों को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर बदलाव कर 4 जिला प्रबंधकों के नाम हटा दिए गए, जबकि स्पेशल जांच टीम ने उन्हें भी दोषी माना था।
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Jul 05, 2026
Rice Procurement Scam
रिपोर्ट बदली (फोटो सोर्स- AI)

रायपुर@राकेश टेम्भुरकर। Chhattisgarh Rice Scam: राज्य नागरिक आपूर्ति निगम कोरबा में हुए करोड़ों के चावल घोटाले में अपने चहेतों और रसूखदार अधिकारियों को बचाने के लिए विभागीय अफसरों द्वारा जांच रिपोर्ट ही बदलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। घोटाला उजागर होने के बाद खाद्य विभाग द्वारा गठित स्पेशल टीम ने जांच में 12 लोगों को दोषी पाया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने अंतिम रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन, मुख्यालय के कई स्तरों से गुजरने के बाद सचिव की टेबल तक जो रिपोर्ट पहुंची, उसमें केवल 8 लोगों के नाम थे और 4 जिला प्रबंधकों के नाम गायब कर दिए गए थे। आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश गढ़पाल ने सूचना के अधिकार के तहत मिले दस्तावेजों के आधार पर इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया है।

दस्तावेजों के अनुसार, 10 सितंबर से 12 दिसंबर 2025 तक कोरबा जिले में पदस्थ गुणवत्ता निरीक्षक प्रकाश बरेठ, महेंद्र शर्मा और सुभाष राठौर ने अन्य जिलों के गुणवत्ता निरीक्षकों की लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर अवैध रूप से चावल उपार्जन का खेल खेला। बालोद, बेमेतरा, जशपुर और सक्ती की कोरबा से दूरी अधिक होने के बावजूद, वहां के निरीक्षकों की आईडी से बिना जांच किए चावल की गुणवत्ता का फर्जी विश्लेषण किया गया।

इनके खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित, बड़े अधिकारी बचे

इस घोटाले में बेमेतरा, बालोद, जशपुर एवं सक्ती में कार्यरत गुणवत्ता निरीक्षक लक्ष्मी देवी बघेल, हर्षल मेश्राम, महेश्वर लाल सोनवानी, रविन्द्र मिंज, प्रणव महेश कुर्रे और मणीशंकर लहरे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। वहीं, तत्कालीन जिला प्रबंधक (कोरबा) प्रमोद जांगड़े को निलंबित और प्रकाश बरेठ को ब्लैक लिस्टेड किया गया है।

अमानक चावल को बताया मानक

जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि सक्ती के प्रणव महेश कुर्रे और कोरबा के प्लेसमेंट कर्मी प्रकाश बरेठ ने मिलकर अमानक (खराब) स्तर के चावल को मानक स्तर का बताकर जमा करा लिया था। इस पूरे नेक्सस में नोटशीट पर जिला बेमेतरा, बालोद, जशपुर और सक्ती के जिला प्रबंधकों के नाम भी सह-आरोपी के रूप में दर्ज थे, जिन्हें अंतिम रिपोर्ट से पूरी तरह गायब कर दिया गया। विभागीय अधिकारियों की इस कूटरचना से अब पूरी जांच पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

Updated on:
05 Jul 2026 01:07 pm
Published on:
05 Jul 2026 01:07 pm