रायपुर

मंत्री का भरोसा कोरा, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी के लिए 25 से 50 लाख की संपत्ति गिरवी रखने की शर्त, जानें क्या है पूरा विवाद और नियम?

NEET PG Admission Rules: छत्तीसगढ़ में सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमडी-एमएस (MD-MS) की पढ़ाई करने की तैयारी कर रहे डॉक्टरों के सामने बड़ी आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है। पीजी में दाखिले के लिए 25 लाख रुपये तक की संपत्ति गिरवी रखने और सुपर स्पेशलिटी कोर्स के लिए 50 लाख रुपये की बैंक गारंटी की शर्त ने गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
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Updated: 24 Oct 2026, 11:31 AM IST
Chhattisgarh Medical Education
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रायपुर@पीलूराम साहू। Medical PG Admission 2026: क्या अब डॉक्टर बनने के लिए भी करोड़ों की हैसियत होना जरूरी है? प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा एक ऐसा कड़वा सच सामने आया है, जो हर आम परिवार की नींद उड़ाने के लिए काफी है। प्रदेश में एमबीबीएस पास कर चुके गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के होनहार युवा अब चाहकर भी पीजी (एमडी-एमएस) की पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है राज्य शासन का वह नियम, जिसके तहत इन डॉक्टरों को प्रवेश के लिए 25 से 50 लाख रुपए की संपत्ति गिरवी रखनी होगी और बैंक गारंटी देनी होगी।

हैरानी की बात यह है कि पिछले महीने जब जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल की थी, तब स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने इस कड़े नियम को खत्म करने का खुला भरोसा दिया था। लेकिन छात्रों का आरोप है कि मंत्री का वह आश्वासन पूरी तरह कोरा साबित हुआ और जमीन पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

क्या है पूरा विवाद और नियम?

छत्तीसगढ़ के 7 सरकारी और 3 निजी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की कुल 642 सीटों पर दाखिले के लिए ऑनलाइन पंजीयन 22 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। शासन से एनओसी पाने के वास्ते 25 लाख रुपए की संपत्ति गिरवी रखना अनिवार्य है। सुपर स्पेशलिटी कोर्स के लिए यही राशि बढ़कर सीधे 50 लाख रुपए हो जाती है। दुर्गम और आदिवासी इलाकों में सेवाएं देने वाले इन डॉक्टरों का कहना है कि वे गरीब परिवारों से आते हैं और इतनी भारी-भरकम राशि की बैंक गारंटी देना उनके वश की बात नहीं है।

उनका साफ कहना है कि बैंक गारंटी के बजाय एफिडेविट (शपथ पत्र) के आधार पर एनओसी जारी की जानी चाहिए। इस मनमाने नियम के खिलाफ डॉक्टरों ने अब सीएम हेल्पलाइन (1076) और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल को भी ज्ञापन सौंपकर गुहार लगाई है। इसके अलावा, हाल ही में पटवारियों की हड़ताल के चलते एनओसी मिलने में आ रही अड़चनों ने छात्रों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।

कोरोनाकाल से अब तक बेपटरी है नीट पीजी का शेड्यूल

सिर्फ संपत्ति का पेंच ही नहीं, बल्कि कोरोनाकाल (2020-21 और 2021-22) के लॉकडाउन और संक्रमण के दौर से बिगड़ा नीट पीजी का शेड्यूल आज तक पटरी पर नहीं लौट पाया है। कभी जनवरी-मार्च में होने वाली परीक्षाएं अब अगस्त तक खिसक चुकी हैं। परिणामस्वरूप, पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (रायपुर) समेत तमाम सरकारी कॉलेजों में जूनियर डॉक्टर देरी से पहुंच रहे हैं, जिससे अस्पतालों में सीनियर डॉक्टरों पर वर्कलोड लगातार बढ़ रहा है और आम मरीजों का इलाज भी प्रभावित हो रहा है।

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24 Oct 2026, 11:31 AM IST
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